04/01/2026
--- ::: नव वर्ष ::: ---
* नव वर्ष * का ये कैसा रूआब है ,
कहीं पश्चिमी सभ्यता का शबाब है ,
तो कहीं आस्था का सैलाब है ,
जरूरत है हर हाल मे खुश रहने की ,
जरूरत है कट्टरता को पचाने की ,
जरूरत है सकुशलता की बधाई देने की ,
क्यों गलियों की खाक छाने हम ,
आज घर पर ही रहते है हम ,
नववर्ष को नव हर्ष बनाते है हम ,
कोई वादा नही करना अपने आप से ,
कूड़ा निकाल देना अपने दिमाग से ,
नव जीवन का आगाज रख आज से ।।।
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये
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