06/06/2025
आज स्वर्गीय मुनेश्वर प्रसाद सिंह जी उर्फ "सिन्हा जी" की 13वीं पुण्यतिथि है। इस अवसर पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं — एक ऐसे व्यक्तित्व को, जो सिर्फ एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक विचार, एक चेतना, एक युगदृष्टा थे।
सिन्हा जी ने सर्वोदय विद्यालय, जेठियन में वर्षों तक बतौर शिक्षक अपनी सेवाएं दीं। लेकिन वे केवल शिक्षा देने वाले शिक्षक नहीं थे — वे शिक्षा जगाने वाले शिक्षक थे। उन्होंने अपने जीवन का हर क्षण ज्ञान की लौ जलाने में समर्पित कर दिया। अनुशासन, भाषा की शुद्धता और वैचारिक स्पष्टता उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान थी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई उनसे प्रभावित था।
उनका भाषण कला में जो अद्भुत प्रभाव था, उसकी मिसाल एक बार तब देखने को मिली, जब तपोवन में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री बिंदेश्वरी दुबे जी का कार्यक्रम आयोजित था। जब मंच से बोलने का अवसर मिला, तो उन्होंने जिस तरह अपने ओज और शब्दों के संयम से वातावरण को बाँध लिया, वह अविस्मरणीय है।
मुख्यमंत्री महोदय ने मंच से ही कहा:
"हमें नहीं पता था कि इस जंगल में भी ऐसे-ऐसे मंगल वाले लोग रहा करते हैं।"
यह एक शिक्षक के लिए नहीं, बल्कि एक पूरे गांव, पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान की बात थी।
वे सिर्फ शिक्षक ही नहीं, सामाजिक चेतना के वाहक भी थे। अपने गांव में हर सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधि में सक्रिय भागीदारी निभाते थे। उनका जीवन एक जीवंत पाठशाला था, जिसमें संस्कार, सेवा, और समर्पण की शिक्षा मिलती थी।
गांव के बच्चे हों या बुज़ुर्ग, सबके दिल में उनके लिए सम्मान और स्नेह था।
आज भी जब उनका नाम लिया जाता है, तो गांव के चेहरे गौरव और भावुकता से भर उठते हैं।
ऐसा व्यक्तित्व अब दुर्लभ है।
🌼 आज उनकी पुण्यतिथि पर हम सब उन्हें नमन करते हैं।
उनका जीवन, उनके विचार, और उनका समर्पण हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा। 🌼
🙏 श्रद्धांजलि उस दीप को, जो बुझकर भी रौशनी दे गया 🙏
"सिन्हा जी" अमर रहें!
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