12/01/2026
जब मैं schools और colleges में students से पूछता हूँ कि
human life में education क्यों ज़रूरी है,
तो ज़्यादातर एक ही जवाब सुनने को मिलता है —
“Sir, पढ़-लिखकर अच्छी job मिल जाए।”
और सच कहूँ…
हर बार यह जवाब सुनकर दिल थोड़ा भारी हो जाता है।
क्योंकि यह जवाब बच्चों का नहीं होता,
यह हमारे education system की conditioning होती है।
हमने education को
धीरे-धीरे एक ऐसी मशीन बना दिया है
जो सिर्फ़ नौकरी पैदा करने के लिए design की गई है।
Marks, degrees, packages —
सब कुछ है,
लेकिन mindset, behaviour और सोच कहीं गायब है।
मेरे लिए education का मतलब
कभी सिर्फ़ job नहीं रहा।
मेरे लिए education का असली purpose है —
human brain को जगाना।
Neuroscience कहती है कि
इंसान का brain पूरा बनकर पैदा नहीं होता।
वह सीखने, सोचने, सवाल करने से बनता है।
अगर education सवाल करना नहीं सिखा रही,
तो वह education नहीं,
सिर्फ़ information dump है।
Psychology भी साफ़ कहती है —
जो सवाल नहीं करता,
वह ज़िंदगी conditioned mind के साथ जीता है।
और जो सवाल करना सीख जाता है,
वही सच में aware और conscious इंसान बनता है।
आज सबसे ज़्यादा तकलीफ़
एक और सच्चाई देखकर होती है —
हमारे आसपास पढ़े-लिखे लोग हैं,
degrees वाले लोग हैं,
लेकिन basic civic sense तक नहीं है।
सार्वजनिक जगहों पर behaviour,
social responsibility,
दूसरों के अधिकारों की समझ —
ये सब जैसे syllabus से ही हटा दिए गए हों।
मेरे हिसाब से यह किसी इंसान की failure नहीं है।
यह उस tuition-centered, marks-driven system की failure है
जिसने दिमाग़ को भरना सिखाया,
लेकिन उसे सोचना नहीं सिखाया।
Human brain बेहद powerful है,
लेकिन उसकी ताक़त
complete development के बिना बाहर नहीं आती।
अधूरा विकसित brain
सिर्फ़ आदेश मानता है।
पूरी तरह विकसित brain
खुद decision लेता है।
अगर education का goal सिर्फ़ job है,
तो हम इंसान नहीं बना रहे,
हम सिर्फ़ trained workers तैयार कर रहे हैं।
और शायद यही वजह है
कि आज हमारे पास
पढ़े-लिखे लोग बहुत हैं,
लेकिन समझदार, ज़िम्मेदार और संवेदनशील इंसान
बहुत कम।