25/12/2025
"मनुस्मृति दहन दिवस" आज भी यह दिन 'भारतीय स्त्री मुक्ति दिवस' और 'सामाजिक न्याय दिवस' के रूप में मनाया जाता है। बाबा साहेब ने इसी दिन स्पष्ट कर दिया था कि भविष्य का भारत किसी प्राचीन दमनकारी ग्रंथ से नहीं, बल्कि समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर चलेगा, जिन्हें बाद में उन्होंने भारत के संविधान में पिरोया। --- आदि लंकेश, राहुल शील उर्फ अर्जुन शील वाल्मीकन
"हमारा यह कार्य किसी धर्म या व्यक्ति के प्रति द्वेष से नहीं है, बल्कि उस विचारधारा के खिलाफ है जो हमें नीचा दिखाती है और हमारे मौलिक अधिकारों का हनन करती है।" -- बाबा साहेब अम्बेडकर जी
•25 दिसंबर 1927 को डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने महाड़ सत्याग्रह के दौरान 'मनुस्मृति' का दहन किया था। बाबा साहेब के लिए यह केवल एक पुस्तक जलाना नहीं था, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही मानसिक और सामाजिक गुलामी की कड़ियों को तोड़ने का एक प्रतीकात्मक विद्रोह था।
•असमानता और अन्याय का प्रतीक
बाबा साहेब का मानना था कि मनुस्मृति 'अन्याय और असमानता' का शास्त्र है। उन्होंने तर्क दिया कि यह ग्रंथ समाज को जातियों में विभाजित करता है और एक बड़े वर्ग (अछूतों और पिछड़ों) को मानवीय अधिकारों से वंचित रखता है। उनके अनुसार, जिस ग्रंथ में इंसान को इंसान न समझा जाए, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
•जाति व्यवस्था का आधार
अम्बेडकर जी ने कहा था कि मनुस्मृति ने जाति व्यवस्था को धार्मिक वैधता प्रदान की है। उन्होंने इसे 'ब्राह्मणवाद का विधान' बताया, जिसने शूद्रों और महिलाओं के लिए कठोर और अपमानजनक नियम बनाए। दहन के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते थे कि अब दलित समाज इन थोपे गए नियमों को और अधिक सहन नहीं करेगा।
•महिलाओं की स्वतंत्रता पर प्रहार
बाबा साहेब अक्सर मनुस्मृति के उन श्लोकों का जिक्र करते थे जो महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करते हैं। उन्होंने महसूस किया कि मनुस्मृति महिलाओं को पुरुषों के अधीन रखती है और उन्हें शिक्षा व संपत्ति के अधिकार से वंचित करती है। दहन का यह कदम महिलाओं की मुक्ति की दिशा में भी एक बड़ा संकेत था।
•आध्यात्मिक गुलामी का अंत
बाबा साहिब अम्बेडकर जी का मानना था कि शारीरिक गुलामी से कहीं अधिक खतरनाक 'आध्यात्मिक और मानसिक गुलामी' है। जब तक दलित वर्ग इस ग्रंथ को पवित्र मानता रहेगा, वह अपनी स्थिति को 'भाग्य' मानकर चुप रहेगा। मनुस्मृति को जलाकर उन्होंने इस मानसिक दासता को नष्ट करने का आह्वान किया।
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