28/11/2025
फुले जी का जीवन—हमारे लिए मार्गदर्शन, समाज के लिए दिशा और परिवर्तन का अनंत प्रकाश
महात्मा ज्योतिराव फुले केवल एक सामाजिक सुधारक नहीं थे, बल्कि वे वह क्रांतिकारी चिंगारी थे जिसने सदियों पुरानी रूढ़ियों, अन्याय और असमानता की जंजीरों को चुनौती देकर भारत में एक नए सामाजिक युग की शुरुआत की। आज जब हम उनके महान जीवन पर दृष्टि डालते हैं, तो हमें एहसास होता है कि फुले जी की लड़ाई केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण और आवश्यक है। आज के समाज में—जहाँ शिक्षा अभी भी हर वर्ग तक नहीं पहुँच पाती, जहाँ जाति, गरीबी और लिंग आधारित भेदभाव अब भी मौजूद है, जहाँ अनेक वर्ग सामाजिक और आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे हैं—फुले जी के विचार हमारे लिए मार्गदर्शक प्रकाश की तरह खड़े हैं।
✦ शिक्षा: वह हथियार जो आज भी सबसे ज़रूरी है
फुले जी ने कहा था कि “अज्ञान ही हर अन्याय की जड़ है।” आज भी समाज में असमानता, हिंसा, भेदभाव, गरीबी—इन सबकी जड़ अज्ञान ही है। फुले जी हमें सिखाते हैं कि जब तक हर बच्चा, हर लड़की, हर गरीब, हर वंचित समूह शिक्षा से नहीं जुड़ेगा—समाज में सच्चा परिवर्तन संभव नहीं है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हमें यह प्रण लेना चाहिए कि हम शिक्षा को सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचाने में सहयोग करेंगे।
✦ समानता: सामाजिक न्याय की रीढ़
फुले जी ने जाति, पितृसत्ता और ऊँच-नीच के खिलाफ जिस साहस से आवाज़ उठाई, वह आज भी हमें दिशा देती है। आज हम भले आधुनिक युग में हों, लेकिन भेदभाव आज भी किसी-न-किसी रूप में मौजूद है—संस्थानों में, समाज में, परिवारों में। फुले जी का दर्शन हमें प्रेरित करता है कि हम समानता को सिर्फ सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवनचर्या बनाएं, और जहां भी अन्याय हो, उसके खिलाफ खड़े हों।
✦ महिलाओं को अधिकार देना—समाज को शक्ति देना
फुले जी का यह दृढ़ विश्वास कि “स्त्री की गिरावट पूरे समाज को गिराती है और उसकी प्रगति पूरे समाज को उठाती है”, आज के समय में और भी प्रासंगिक है। मात्र पढ़ाई ही नहीं, बल्कि महिला की स्वतंत्र सोच, सम्मान, सुरक्षा और अधिकार—ये सब समाज की प्रगति की रीढ़ हैं। आज यह हमारा कर्तव्य है कि हम हर बेटी, बहन, मां और स्त्री को वह सम्मान और अवसर दें, जिसकी फुले जी ने कल्पना की थी।
✦ किसानों और श्रमिकों के सम्मान का संदेश
फुले जी ने किसान को देश की आत्मा कहा था। आज भी किसान और मजदूर समाज का सबसे मेहनतकश और संघर्षरत वर्ग है। उनका सम्मान, उनका अधिकार, उनकी सुरक्षा—ये भी फुले जी के सपने का हिस्सा थे। हमारा देश तभी मजबूत होगा जब किसान-मजदूर मजबूत होंगे।
✦ भय-रहित समाज: जहाँ प्रश्न पूछना अपराध नहीं
फुले जी ने हमेशा तर्क, सवाल और सत्य की वकालत की।
उन्होंने सिखाया— “सवाल पूछने वाला मन ही स्वतंत्र होता है।”
आज आवश्यकता है कि हम अंधविश्वास, रूढ़ियों और अन्याय के खिलाफ निर्भीक होकर खड़े हों और तर्क व विज्ञान का साथ दें। फुले जी विचार नहीं—क्रांति हैं; और यह क्रांति आज भी जारी है —महात्मा ज्योतिराव फुले हमें सिखाते हैं कि परिवर्तन सत्ता से नहीं, समाज से आता है; आवाज़ ताकत से नहीं, सत्य से उठती है; और क्रांति आग से नहीं, विचारों से जलती है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हमें केवल श्रद्धांजलि नहीं देनी, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन, अपने परिवार और अपने समाज में उतारने का संकल्प लेना है।
ंकल्प_लें—
✦ हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का
✦ हर स्त्री को सम्मान और अवसर देने का
✦ हर अन्याय, भेदभाव और असमानता के खिलाफ खड़े होने का
✦ जाति और पितृसत्ता के बंधनों को तोड़ने का
और उस भारत के निर्माण का जिसका सपना फुले जी ने देखा था—
एक ऐसा भारत जहाँ इंसान की पहचान जाति नहीं, उसकी मानवता हो।
✦ यही फुले जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। यही हमारे समाज की सच्ची प्रगति है। और यही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे सुंदर उपहार होगा।