तार्किक तथ्य

तार्किक तथ्य Page Dedicated To Critical Thinkers दलित मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के उद्धार के लिए छोटी सी आवाज
(503)

18/02/2025

फ़िल्मों के ज़रिए मुगलों से बदला लिया जा रहा है 😀
बेचारे इसी से दिल बहला रहे हैं असलियत से बिल्कुल परे 😀

यूपी सीएम आदित्यनाथ जिस वक्त विधानभवन में मुसलमानों को कठमुल्ला बोल कर अपनी खीज निकाल रहे थे।ठीक उसी वक्त स्पीकर महोदय स...
18/02/2025

यूपी सीएम आदित्यनाथ जिस वक्त विधानभवन में मुसलमानों को कठमुल्ला बोल कर अपनी खीज निकाल रहे थे।

ठीक उसी वक्त स्पीकर महोदय सतीश महाना अपने संस्कारों के परिचय देते हुए मुस्कुरा रहे थे।

देश और प्रदेश की राजनीति इस घटिया नफ़रत तक जा चुकी है लोग मज़ाक उड़ा रहे हैं?

18/02/2025

ये देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री की भाषा है
और लोग इसे प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं

18/02/2025

बस देख डालो 🤣🤣🤣🤣

17/02/2025

दुकानदार:- आपकी उधारी बढ़ती जा रही है पैसा कब दोगे..?
अंडभक्त:- भारत एक लोकतांत्रिक देश है, वसुधैव कुटुंबकम हमारी परंपरा है.!😁

कौन जात हो भाई?“दलित हैं साब!”नहीं मतलब किसमें आते हो?आपकी गाली में आते हैंगंदी नाली में आते हैंऔर अलग की हुई थाली में आ...
17/02/2025

कौन जात हो भाई?
“दलित हैं साब!”

नहीं मतलब किसमें आते हो?
आपकी गाली में आते हैं

गंदी नाली में आते हैं
और अलग की हुई थाली में आते हैं साब!

मुझे लगा हिंदू में आते हो!
आता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या खाते हो भाई?
“जो एक दलित खाता है साब!”

नहीं मतलब क्या-क्या खाते हो?
आपसे मार खाता हूँ

क़र्ज़ का भार खाता हूँ
और तंगी में नून तो कभी अचार खाता हूँ साब!

नहीं मुझे लगा कि मुर्ग़ा खाते हो!
खाता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या पीते हो भाई?
“जो एक दलित पीता है साब!

नहीं मतलब क्या-क्या पीते हो?
छुआ-छूत का ग़म

टूटे अरमानों का दम
और नंगी आँखों से देखा गया सारा भरम साब!

मुझे लगा शराब पीते हो!
पीता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या मिला है भाई
“जो दलितों को मिलता है साब!

नहीं मतलब क्या-क्या मिला है?
ज़िल्लत भरी ज़िंदगी

आपकी छोड़ी हुई गंदगी
और तिस पर भी आप जैसे परजीवियों की बंदगी साब!

मुझे लगा वादे मिले हैं!
मिलते हैं न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या किया है भाई?
“जो दलित करता है साब!

नहीं मतलब क्या-क्या किया है?
सौ दिन तालाब में काम किया

पसीने से तर सुबह को शाम किया
और आते जाते ठाकुरों को सलाम किया साब!

मुझे लगा कोई बड़ा काम किया!
किया है न साब! आपके चुनाव का प्रचार!”

- बच्चा लाल 'उन्मेष'

अकेले दुश्मन के सात टैंक तबाह करने वाला जांबाज अपने ही देश के अंग्रेजी दलालों से हार गया.भारत जब अपनी आजादी की लड़ाई लड़...
17/02/2025

अकेले दुश्मन के सात टैंक तबाह करने वाला जांबाज अपने ही देश के अंग्रेजी दलालों से हार गया.

भारत जब अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा था, उसी दौरान 1933 में यूपी के गाजीपुर में एक लड़का पैदा हुआ. नाम था अब्दुल हमीद. ये बच्चा बड़ा होकर भारतीय सेना में भर्ती हो गया.

8 सितंबर, 1965. भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है. पंजाब के खेमकरण क्षेत्र के चीमा गांव के पास कपास और गन्ने के खेतों में कुछ जवान छुपे हुए हैं. उन्हें पाकिस्तानी पैटन टैंकों की गड़गड़ाहट सुनाई देती है. सड़क से करीब 30 मीटर की दूरी पर अब्दुल हमीद कपास के पौधों के बीच एक जीप में अपनी गन के साथ छिपे हैं. उन्हें कई पाकिस्तानी टैंक दिखाई देते हैं. जैसे ही पहला टैंक अब्दुल हमीद की शूटिंग रेंज में आया, उन्होंने अपनी आरसीएल गन झोंक दी. टैंक में आग लग गई.

पहले टैंक में आग लगते ही कर्नल हरिराम जानू ने देखा कि पीछे आ रहे टैंकों के ड्राइवर उन्हें बीच सड़क पर छोड़कर भाग गए. आरसीएल गन सिर्फ़ एक-दो या ज़्यादा से ज़्यादा तीन फ़ायर किए जा सकते हैं. फिर भी हमीद ने दूसरा टैंक भी ध्वस्त कर दिया.

अगले दिन पाकिस्तानियों ने टैंकों की मदद से तीन हमले किए. अब्दुल हमीद और हवलदार बीर सिंह ने मिलकर दो-दो टैंक और तबाह किए. 10 सितंबर को पाकिस्तान ने जबरदस्त गोलाबारी शुरू की. भारतीय सैनिक हमले के इंतजार में थे. अचानक उन्हें टैंकों की आवाज़ सुनाई पड़ी. हमीद की नज़र टैंक पर तब पड़ी जब वह उनसे 180 मीटर दूर पहुंच चुका था. हमीद ने टैंक पास आने दिया और फिर उस पर सटीक निशाना लगाया. टैंक जलने लगा. हमीद तेज़ी से अपनी जीप को दूसरी तरफ़ ले गए ताकि दुश्मन उनकी लोकेशन पता न कर सके.

कर्नल जानू ने हमीद से कहा कि वे बाकी टैंकों पर फ़ायर न करें. जब ये टैंक इनकी पोज़ीशन के ऊपर से गुज़र गए तो हमीद ने पीछे से निशाना लगाकर उसे तबाह किया. हमीद तीसरे टैंक पर निशाना लगा रहे थे तभी उन्हें देख लिया गया. दोनों तरफ से एक साथ ट्रिगर दबा. दो गोले फटे. हमीद का गोला टैंक पर लगा और टैंक के गोले ने हमीद की जीप को उड़ा दिया.

हमीद के ड्राइवर थे मोहम्मद नसीम. उनकी जुबानी, 'हमीद की उंगली ट्रिगर पर थी कि उधर से पाकिस्तानी टैंक का गोला आ गया. वो सीधा हमीद के शरीर पर लगा और उनके जिस्म का ऊपरी हिस्सा कटकर दूर जा गिरा. मैं दौड़ता-दौड़ता कर्नल रसूल के पास गया. मैंने उनको बताया कि हमीद ख़त्म हो गए. उन्हें मेरी बात पर यकीन नहीं हुआ. मैंने सामने पड़े मलबे में हाथ डाला, तो मेरा हाथ हमीद की पसलियों में घुस गया. थोड़ी-थोड़ी दूर पर उनके शरीर के दूसरे अंग पड़े थे. हमने सबको इकट्ठा किया और वहीं गडढ़ा खोदकर उन्हें दफ़नाया.'

लड़ाई अभी ख़त्म नही हुई थी. पाकिस्तान की तरफ से तीन आरसीएल जीप आती हुई दिखाई दीं. लाइट मशीन गन पोस्ट पर खड़े शफ़ीक, नौशाद और सुलेमान ने बिना फ़ायरिंग आदेश का इंतज़ार किए उन पर फ़ायरिंग कर दी. पहली जीप में सवार सभी पाकिस्तानी सैनिक मारे गए लेकिन तीसरी जीप तेज़ी से वापस मुड़ी और भागने में सफल रही.

इधर लड़ाई चल ही रही थी कि भारतीय सैनिकों ने पास की एक नहर का किनारा काट दिया जिससे पूरे इलाके में पानी भर गया. उस इलाके में जितने टैंक थे, वहीं फंस गए. पाकिस्तानी टैंकों की संख्या इतनी ज़्यादा थी कि कर्नल सालेब ने पैटन टैंकों पर पेंट से गिनती लिखने को कहा. पाकिस्तान ने सोचा नहीं था कि भारत ऐसी तरकीब का इस्तेमाल करेगा. 11 सितंबर को खेमकरण में पाकिस्तान की ओर से हमला रोक दिया गया.

भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कुल 94 टैंक तबाह किए. इनमें से सात टैंक अकेले अब्दुल हमीद ने बर्बाद किए थे. अब्दुल हमीद ने इस युद्ध में बेमिसाल बहादुरी दिखाई थी. उन्हें भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाजा.

खबर है कि उनकी सरजमीं पर किसी स्कूल में उनका नाम लिखा था जिसे मिटा दिया गया है. दुनिया की सबसे निकृष्ट कौम वह है जो अपने शहीदों को अपमानित करे. ये नमकहराम लोग खुद को राष्ट्रवादी कहते हैं!

Krishna Kant

16/02/2025

हिंदुओं को हिंदू न मानें, मुसलमानों को भारतीय न मानें, विपक्षी को देशभक्त न मानें फिर भी 100% विश्व इनका अपना कुटुंब है!

16/02/2025

तुमने चुना ही है उसे
क़त्ल-ए-आम का हुनर देखकर,
तो मायूस क्यों हो रहे हो अब लाशों का ढेर देखकर?

पिछले कुछ दिनों में दो भगदड़ हो चुकी हैं, अब आप बताइए कि इन भगदड़ों में कोई नेता मरा?कोई नेता के परिवार का मरा?कोई सेलिब...
16/02/2025

पिछले कुछ दिनों में दो भगदड़ हो चुकी हैं, अब आप बताइए कि इन भगदड़ों में

कोई नेता मरा?
कोई नेता के परिवार का मरा?
कोई सेलिब्रिटी मरा?
कोई ब्यूरोक्रेट मरा?

आपका जवाब होगा कि "नहीं मारा" तो फिर मरने वाले कौन हैं?

ग़रीब
मज़दूर
किसान
मिडिल क्लास

ये जो मरने वाले लोग हैं इन्हें बताया गया है कि सरकार तो बस नौकर होती है असली मालिक यही हैं,

क्या इस देश में आम इंसान होना इतनी दुर्भाग्य की बात है?

16/02/2025

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ से चंद मिनट पहले का वीडियो...

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क्या आप यकीन करेंगे कि 2025 में भारतीय शेयर बाजार की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि इसने ज़िम्बाब्वे और आइसलैंड को भी पीछ...
15/02/2025

क्या आप यकीन करेंगे कि 2025 में भारतीय शेयर बाजार की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि इसने ज़िम्बाब्वे और आइसलैंड को भी पीछे छोड़ दिया है?

जी हाँ! वह भारत, जो कभी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, अब अपने शेयर बाजार की ऐतिहासिक गिरावट के लिए बदनाम हो रहा है। भारतीय शेयर बाजार का कुल बाजार पूंजीकरण अब चार ट्रिलियन डॉलर से भी नीचे आ चुका है—यह महज़ संख्या नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लहूलुहान होने की गवाही है।

ये गिरावट यूँ ही नहीं आई। इसकी जड़ें गहरी हैं—वैश्विक उथल-पुथल के साथ-साथ भारत की नीतिगत अस्थिरता और निवेशकों के बढ़ते अविश्वास ने मिलकर इस विनाशकारी स्थिति को जन्म दिया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत, जो दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा शेयर बाजार था, अब 18.33% की भयावह गिरावट झेल रहा है।,,,, वहीं ज़िम्बाब्वे, जिसकी अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे नाकाम व्यवस्थाओं में गिना जाता है, वहाँ भी गिरावट भारत से कम है—सिर्फ 18.3%।
सोचिए, जिस देश के शेयर बाजार में कभी बुल रन की चर्चाएँ होती थीं, वह अब ऐसे देशों से भी पीछे छूट रहा है! इसके उलट, अमेरिका का शेयर बाजार 3% चढ़ चुका है, चीन और जापान में 2.2% की वृद्धि हुई है, और फ्रांस तो सबसे आगे निकल चुका है।

भारत के शेयर बाजार की यह दुर्गति 2025 के आरंभ से ही साफ दिखने लगी थी। सेंसेक्स और निफ्टी पहले ही 2.6% लुढ़क चुके हैं, लेकिन असली कहर मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर टूटा—मिडकैप में 12% और स्मॉलकैप में 15% की गिरावट।

नतीजा?
भारतीय शेयर बाजार का कुल पूंजीकरण 3.99 ट्रिलियन डॉलर पर आ चुका है, जो 4 दिसंबर 2023 के 5.14 ट्रिलियन डॉलर के स्तर से करीब 1.15 ट्रिलियन डॉलर कम है। यह कोई मामूली गिरावट नहीं, बल्कि सुनामी है, जिसने लाखों निवेशकों को डुबो दिया है।

इस भयावह पतन के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय रुपये की कमजोरी है। 2025 में अब तक रुपया 1.5% गिर चुका है, जिससे यह इंडोनेशिया के बाद एशिया की दूसरी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन चुका है।
यह उस कड़वे सच का ऐलान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हिल चुकी है। विदेशी निवेशकों की मार भी किसी तूफान से कम नहीं रही—उन्होंने इस साल भारतीय बाजार से अरबों डॉलर निकाल लिए, जिससे बाजार का हाल और भी खराब हो गया।

लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं था। वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से उपजा व्यापार युद्ध का डर और भारतीय शेयरों की अत्यधिक कीमतों ने इस तबाही में आग में घी डालने का काम किया। जब वैश्विक निवेशक भारत की तरफ देखने से भी कतरा रहे हों, तो स्थानीय निवेशकों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

अब सवाल उठता है—क्या इस गर्त से बाहर निकलने का कोई रास्ता है?
मेरे हिसाब से निवेशकों को मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों से दूर रहना चाहिए। इन शेयरों का मूल्यांकन इतना अधिक हो चुका है कि निवेशकों को किसी भी समय भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके बजाय, ब्लूचिप स्टॉक्स को प्राथमिकता दें—पर सवाल यह है कि जब पूरी अर्थव्यवस्था डगमगा रही हो, तो क्या सच में कोई सुरक्षित ठिकाना बचा भी है?

अगर आपके पास कम पूंजी है, तो आपको हर कदम बहुत सोच-समझकर रखना होगा। पहली गलती जो अधिकतर छोटे निवेशक करते हैं, वह है जल्दी अमीर बनने की लालसा में हाई-रिस्क स्टॉक्स में कूद पड़ना। याद रखें, शेयर बाजार में धैर्य सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे मजबूत स्टॉक्स चुनें, जिनके फंडामेंटल्स मजबूत हों, जिनकी बैलेंस शीट अच्छी हो, और जिनका बिजनेस मॉडल टिकाऊ हो। सस्ते दिखने वाले स्टॉक्स में न फंसें—अक्सर ये सस्ता बाद में और ज्यादा गिर सकता है। SIP (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) जैसी रणनीतियां अपनाएं, जहां आप धीरे-धीरे लेकिन लगातार निवेश करें, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा उठा सकें।

अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा पड़ा हुआ है, तो यह बाजार में बड़े मौके उठाने का सबसे सही समय हो सकता है। जब मार्केट गिर रहा हो और लोग डर के कारण बेच रहे हों, तो यही वह समय होता है जब आपको सबसे बेहतरीन स्टॉक्स सस्ते में मिल सकते हैं।
लेकिन एक गलती बिल्कुल न करें—पूरी पूंजी एक साथ मत झोंकिए! बाजार कभी भी एक दिशा में नहीं चलता, इसलिए धीरे-धीरे निवेश करें, और गिरावट का पूरा फायदा उठाएं। कोशिश करें कि अतिरिक्त पूंजी का निवेश लंबे समय के लिए करें, ताकि आपको कंपाउंडिंग का फायदा मिल सके।

शेयर बाजार में जीतने वाले वे नहीं होते जो सबसे ज्यादा ट्रेडिंग करते हैं, बल्कि वे होते हैं जो सही समय पर सही फैसले लेते हैं। चाहे कम पूंजी हो या ज्यादा, असली खेल धैर्य और समझदारी का है। बाजार में घबराहट से बचिए, और अपनी रणनीति खुद बनाइए।

⚠️डिस्क्लेमर: मैं कोई निवेश विशेषज्ञ नहीं हूं, बस एक कंसर्न्ड सिटीज़न हूं और अपने विचार साझा कर रहा हूं। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है, इसे निवेश सलाह न मानें। निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें या किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।



Manoj Abhigyan

ओके बाय
14/02/2025

ओके बाय

ये वही चरस है जो पिछले 10 सालो से भारतीय लोगो को जबरदस्ती पिलाई जा रही है
14/02/2025

ये वही चरस है जो पिछले 10 सालो से भारतीय लोगो को जबरदस्ती पिलाई जा रही है

मुसलमानो से नफ़रत की बुनियाद पर दलितों और ओबीसी हिन्दुओं का सिर्फ वोट चाहिए इनके हिस्से का सम्मान तो सदियों से इन्हें मि...
14/02/2025

मुसलमानो से नफ़रत की बुनियाद पर दलितों और ओबीसी हिन्दुओं का सिर्फ वोट चाहिए
इनके हिस्से का सम्मान तो सदियों से इन्हें मिला ही नहीं

The first step is always the hardest.
14/02/2025

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सेठ के दोस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस की खासियत यह है कि यहां सवाल प्लांटेड नहीं है..यहां सवाल करने वालों पर मुकदमा दर्ज नहीं...
14/02/2025

सेठ के दोस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस की खासियत यह है कि यहां सवाल प्लांटेड नहीं है..

यहां सवाल करने वालों पर मुकदमा दर्ज नहीं होगा
यहां बिना CBI और ईडी के डर के सवाल किए जाते हैं
यहां सवालों के आधार पर राज्यसभा नही भेजा जाता

प्रधानमंत्री की ऐसी प्रेस कॉन्फ्रेंस का सौभाग्य भारत को 2014 से नही मिला, इसलिए यूएस वालों को किसी भूखे को खाना खिलाकर शुकराना अदा करना चाहिए

यही कारण है की दुनिया मे कभी युद्ध ख़त्म नहीं होने देते शक्तिशाली देश!आज दुनिया के शक्तिशाली देश विकासशील देशों पर दबाव ब...
14/02/2025

यही कारण है की दुनिया मे कभी युद्ध ख़त्म नहीं होने देते शक्तिशाली देश!
आज दुनिया के शक्तिशाली देश विकासशील देशों पर दबाव बनाकर हथियार बेचते हैँ!
भारत भी उसी मे से एक की! दुनिया का हर देश जब तक कर्ज़ मे दुबा रहेगा तब तक पश्चमी ताकतों और संगठनों की चलती रहेगी!

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