15/02/2025
क्या आप यकीन करेंगे कि 2025 में भारतीय शेयर बाजार की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि इसने ज़िम्बाब्वे और आइसलैंड को भी पीछे छोड़ दिया है?
जी हाँ! वह भारत, जो कभी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, अब अपने शेयर बाजार की ऐतिहासिक गिरावट के लिए बदनाम हो रहा है। भारतीय शेयर बाजार का कुल बाजार पूंजीकरण अब चार ट्रिलियन डॉलर से भी नीचे आ चुका है—यह महज़ संख्या नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लहूलुहान होने की गवाही है।
ये गिरावट यूँ ही नहीं आई। इसकी जड़ें गहरी हैं—वैश्विक उथल-पुथल के साथ-साथ भारत की नीतिगत अस्थिरता और निवेशकों के बढ़ते अविश्वास ने मिलकर इस विनाशकारी स्थिति को जन्म दिया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत, जो दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा शेयर बाजार था, अब 18.33% की भयावह गिरावट झेल रहा है।,,,, वहीं ज़िम्बाब्वे, जिसकी अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे नाकाम व्यवस्थाओं में गिना जाता है, वहाँ भी गिरावट भारत से कम है—सिर्फ 18.3%।
सोचिए, जिस देश के शेयर बाजार में कभी बुल रन की चर्चाएँ होती थीं, वह अब ऐसे देशों से भी पीछे छूट रहा है! इसके उलट, अमेरिका का शेयर बाजार 3% चढ़ चुका है, चीन और जापान में 2.2% की वृद्धि हुई है, और फ्रांस तो सबसे आगे निकल चुका है।
भारत के शेयर बाजार की यह दुर्गति 2025 के आरंभ से ही साफ दिखने लगी थी। सेंसेक्स और निफ्टी पहले ही 2.6% लुढ़क चुके हैं, लेकिन असली कहर मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर टूटा—मिडकैप में 12% और स्मॉलकैप में 15% की गिरावट।
नतीजा?
भारतीय शेयर बाजार का कुल पूंजीकरण 3.99 ट्रिलियन डॉलर पर आ चुका है, जो 4 दिसंबर 2023 के 5.14 ट्रिलियन डॉलर के स्तर से करीब 1.15 ट्रिलियन डॉलर कम है। यह कोई मामूली गिरावट नहीं, बल्कि सुनामी है, जिसने लाखों निवेशकों को डुबो दिया है।
इस भयावह पतन के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय रुपये की कमजोरी है। 2025 में अब तक रुपया 1.5% गिर चुका है, जिससे यह इंडोनेशिया के बाद एशिया की दूसरी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन चुका है।
यह उस कड़वे सच का ऐलान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हिल चुकी है। विदेशी निवेशकों की मार भी किसी तूफान से कम नहीं रही—उन्होंने इस साल भारतीय बाजार से अरबों डॉलर निकाल लिए, जिससे बाजार का हाल और भी खराब हो गया।
लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं था। वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से उपजा व्यापार युद्ध का डर और भारतीय शेयरों की अत्यधिक कीमतों ने इस तबाही में आग में घी डालने का काम किया। जब वैश्विक निवेशक भारत की तरफ देखने से भी कतरा रहे हों, तो स्थानीय निवेशकों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।
अब सवाल उठता है—क्या इस गर्त से बाहर निकलने का कोई रास्ता है?
मेरे हिसाब से निवेशकों को मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों से दूर रहना चाहिए। इन शेयरों का मूल्यांकन इतना अधिक हो चुका है कि निवेशकों को किसी भी समय भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके बजाय, ब्लूचिप स्टॉक्स को प्राथमिकता दें—पर सवाल यह है कि जब पूरी अर्थव्यवस्था डगमगा रही हो, तो क्या सच में कोई सुरक्षित ठिकाना बचा भी है?
अगर आपके पास कम पूंजी है, तो आपको हर कदम बहुत सोच-समझकर रखना होगा। पहली गलती जो अधिकतर छोटे निवेशक करते हैं, वह है जल्दी अमीर बनने की लालसा में हाई-रिस्क स्टॉक्स में कूद पड़ना। याद रखें, शेयर बाजार में धैर्य सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे मजबूत स्टॉक्स चुनें, जिनके फंडामेंटल्स मजबूत हों, जिनकी बैलेंस शीट अच्छी हो, और जिनका बिजनेस मॉडल टिकाऊ हो। सस्ते दिखने वाले स्टॉक्स में न फंसें—अक्सर ये सस्ता बाद में और ज्यादा गिर सकता है। SIP (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) जैसी रणनीतियां अपनाएं, जहां आप धीरे-धीरे लेकिन लगातार निवेश करें, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा उठा सकें।
अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा पड़ा हुआ है, तो यह बाजार में बड़े मौके उठाने का सबसे सही समय हो सकता है। जब मार्केट गिर रहा हो और लोग डर के कारण बेच रहे हों, तो यही वह समय होता है जब आपको सबसे बेहतरीन स्टॉक्स सस्ते में मिल सकते हैं।
लेकिन एक गलती बिल्कुल न करें—पूरी पूंजी एक साथ मत झोंकिए! बाजार कभी भी एक दिशा में नहीं चलता, इसलिए धीरे-धीरे निवेश करें, और गिरावट का पूरा फायदा उठाएं। कोशिश करें कि अतिरिक्त पूंजी का निवेश लंबे समय के लिए करें, ताकि आपको कंपाउंडिंग का फायदा मिल सके।
शेयर बाजार में जीतने वाले वे नहीं होते जो सबसे ज्यादा ट्रेडिंग करते हैं, बल्कि वे होते हैं जो सही समय पर सही फैसले लेते हैं। चाहे कम पूंजी हो या ज्यादा, असली खेल धैर्य और समझदारी का है। बाजार में घबराहट से बचिए, और अपनी रणनीति खुद बनाइए।
⚠️डिस्क्लेमर: मैं कोई निवेश विशेषज्ञ नहीं हूं, बस एक कंसर्न्ड सिटीज़न हूं और अपने विचार साझा कर रहा हूं। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है, इसे निवेश सलाह न मानें। निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें या किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
Manoj Abhigyan