31/12/2025
पहाड़ों की गोद में सोया एक नाम,
मगध की मिट्टी में बसा गुरपा ग्राम।
जंगल की साँसें, गुफ़ाओं का राग,
इतिहास की चुप्पी में बोलता हर एक पात।
गुरुओं की तपस्या, ऋषियों का वास,
मौन में भी गूंजे विश्वास की आस।
किले के खंडहर कहें वीरों की बात,
हर पत्थर सहेजे समय की सौगात।
हल की लकीरों में मेहनत का मान,
किसान के पसीने से महके हर प्राण।
सादगी का गहना, सच्चाई की छाप,
माटी से जुड़ा है गुरपा का ख्वाब।
आज भी हवाएँ बतातीं कहानी,
कल भी जियेगी इसकी निशानी।
नाम नहीं बस, पहचान है ये—
गर्व की धरती, हमारा गुरपा है ये। ...... किन-किन bhai log ko yah Kavita acchi lagi hai ki kripya share Karen aur like Karen 💕👍