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22/05/2022

तो सूरज डूब जाएगा तुम्हारी भी हुकूमत का

कौन कहता हैं अच्छे दिन नहीं आएं।देश तरक्की करें ना करें मगर इनकी तरक्की जारी रहेगी।।
11/05/2022

कौन कहता हैं अच्छे दिन नहीं आएं।

देश तरक्की करें ना करें मगर इनकी तरक्की जारी रहेगी।।

पहले होर्डिंग पर लिखे शब्दों को ध्यान से पढ़िए फिर सड़क की हालत देखिए उसके बाद आप कमेंट बॉक्स में अपने विचार लिखिए
05/05/2022

पहले होर्डिंग पर लिखे शब्दों को ध्यान से पढ़िए फिर सड़क की हालत देखिए उसके बाद आप कमेंट बॉक्स में अपने विचार लिखिए

"महंगाई डायन खाए जात है।"
01/05/2022

"महंगाई डायन खाए जात है।"

जल्दी ही विश्व गुरु बनने वाला है भारत
01/05/2022

जल्दी ही विश्व गुरु बनने वाला है भारत

एक भाई को ट्रेन में बिना टिकट चढ़ने की आदत थी। कभी पकड़े नही गये इसलिये मन भी बढ़ता गया। अब वो किसी की भी सीट पर जाकर जबर्द...
27/04/2022

एक भाई को ट्रेन में बिना टिकट चढ़ने की आदत थी। कभी पकड़े नही गये इसलिये मन भी बढ़ता गया। अब वो किसी की भी सीट पर जाकर जबर्दस्ती बैठ भी जाते थे। टोकने पर हाथापाई पर उतर जाते थे।

ऐसे ही दिन दिन भाई का मन बढते गया। एक दिन एयर कंडीशन बोगी में चढ़ गये बिना टिकट। और जाकर एक सज्जन की सीट पर बैठ गये। सज्जन ने मना किया तो आदतन शुरु हो गये, पहले भला बुरा कहा, फिर धमकी देने लगे, उससे भी काम नही चला तो हाथापाई पर उतारु हो गये। उस सज्जन ने फोन कर पुलिस को बुला दिया।

पुलिस के सामने भी हेकड़ी बघार रहे थे तबतक टीटी भी आ गये। उन्होने आते के साथ सबसे पहले उनसे टिकट मांगा।

अब टिकट तो उनके पास था नही तो आँय बांय बकने लगे। टीटी ने फ़ाइन की बात की, पुलिस ने अरेस्ट करने की बात की तो कहने लगे, जब मै स्टेशन में घुसा तब आपलोग कहाँ थे?

जब मै ट्रेन में चढ़ा तब क्यों नही रोका? जब यहाँ आकर बैठा तब तो आपलोगों ने मना नही किया।

अब ये आदमी हमसे झगड़ा करने लगा तो आपलोग टिकट के बहाने इसकी तरफदारी में लग गये?

अब मेरे पास पैसा नही है और जाना इसी ट्रेन में है तो क्या आप हमको ट्रेन में से फेंक दिजियेगा?

कहाँ का न्याय है ये। हम वर्षों से बिना टिकट चल रहे थे तब आपको क्यों नही दिखा?

अब आप खाली इस आदमी का पक्ष लेने के लिये फ़ाइन लगाने लगे?

अब उसकी हिम्मत देख, दो चार बिना टिकट यात्री और आ गये उसके पक्ष में और पुरा हंगामा शुरु कर दिये। ये क्या तरीका है?

आपलोग तानाशाही कर रहे हैं!ये आदमी झगड़ा नही करता तो आप आते क्या? आप खाली इस आदमी के सपोर्ट में ये सब कर रहे हैं। घोर अन्याय है ये। गरीबों को तो कोई देखने वाला नही है! रेल गरीबों की दुश्मन है!

टीटी और पुलिस की समझ में नही आ रहा था कि बिना टिकट यात्री को फ़ाइन और अरेस्ट करने की बात करके उन्होने गलत किया या सही???

बस आजकल कुछ इसी तरह देश में कुछ मुफ्तखोर मुफ्तखोरी को अपना अधिकार समझने लगे है _
®

कुदरत का करिश्मा
25/04/2022

कुदरत का करिश्मा

25/04/2022
मौजूदा भारतीय न्याय व्यवस्था
24/04/2022

मौजूदा भारतीय न्याय व्यवस्था

सच तो यही है
23/04/2022

सच तो यही है

हर त्रासदी में ही संदेश छुपा होता है। दिल्ली के जहांगीरपुरी में गरीब मुसलमानों के घर पर बुल्डोजर चला तो मलबे में से एक प...
20/04/2022

हर त्रासदी में ही संदेश छुपा होता है। दिल्ली के जहांगीरपुरी में गरीब मुसलमानों के घर पर बुल्डोजर चला तो मलबे में से एक पोस्टर निकला- मेरा भारत महान!

बिना जांच, बिना अदालती प्रक्रिया के, बिना अदालती आदेश के लोगों का घर गिराये जाने से बड़ी महानता और क्या होगी?

सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया जिसने जहांगीरपुरी में सरकारी विध्वंस का त्वरित संज्ञान लिया और बुलडोजर की कार्रवाई पर रोक लगा दी।

कुछ कथाकथित देश भग्त या यु कहे मोदी भक्त बोल रहे थे नीबू के किसान की आय दोगुनी कर दी मोदी ने किसान की हालत देख लो👇
16/04/2022

कुछ कथाकथित देश भग्त या यु कहे मोदी भक्त बोल रहे थे नीबू के किसान की आय दोगुनी कर दी मोदी ने किसान की हालत देख लो👇

08/04/2022

जीतने के लिए ज़िद होनी चाहिए,

हारने के लिए तो डर ही काफी है!❣️

बधाईCAG रिपोर्ट 2020-21 में 872 करोड़ का पता ही नहीं कौन डकार गया....बाकी आप देख लो🤔
04/04/2022

बधाई
CAG रिपोर्ट 2020-21 में 872 करोड़ का पता ही नहीं कौन डकार गया....बाकी आप देख लो🤔

देखे कितने राष्ट्रभक्त है इस पेज पर 2 जो इस लूट के खिलाफ आवाज़ उठाते है. अफ़सोस की ये खबर भी अखबार के अंदरूनी पन्ने में जग...
04/04/2022

देखे कितने राष्ट्रभक्त है इस पेज पर 2 जो इस लूट के खिलाफ आवाज़ उठाते है. अफ़सोस की ये खबर भी अखबार के अंदरूनी पन्ने में जगह पा सकी
#जनता_से_लूट

विकास कुछ इस तरह हो रहा है
03/04/2022

विकास कुछ इस तरह हो रहा है

नीरव मोदी का लंदन कोर्ट में खुलासा।दुग्गल साहब तो कहते थे ना खाऊंगा ना खाने दूंगा।
30/03/2022

नीरव मोदी का लंदन कोर्ट में खुलासा।
दुग्गल साहब तो कहते थे ना खाऊंगा ना खाने दूंगा।

पेट्रोल पर  महंगाई  की मार,अब तो  हद  हो गई है  यार।जनता की भी  सुनो  सरकार,उम्मीद नहीं है कोई बरकरार।
30/03/2022

पेट्रोल पर महंगाई की मार,
अब तो हद हो गई है यार।

जनता की भी सुनो सरकार,
उम्मीद नहीं है कोई बरकरार।

झटके धीरे धीरे, एक साथ 20 रुपए भी बढ़ा सकते हैं, देश तो तैयार ही है !
29/03/2022

झटके धीरे धीरे, एक साथ 20 रुपए भी बढ़ा सकते हैं, देश तो तैयार ही है !

""फिल्मों में छुट, किताबों में लूट🤔""अब किताबों के कलेक्शन के बदले चैप्टरवाइज फिल्मों का कलेक्शन रखना शुरू कर दीजिए।किता...
27/03/2022

""फिल्मों में छुट, किताबों में लूट🤔""

अब किताबों के कलेक्शन के बदले चैप्टरवाइज फिल्मों का कलेक्शन रखना शुरू कर दीजिए।

किताब 15 और काफी 25फीसदी तक हुईं महंगी पिछले वर्ष के मुताबिक इस बार।

जौनपुर ज़िले के बदलापुर इलाक़े में दलित महिलाओं ने पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है कि पुलिस ने दर...
24/03/2022

जौनपुर ज़िले के बदलापुर इलाक़े में दलित महिलाओं ने पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है कि पुलिस ने दर्जन भर महिलाओ की झमाझम कुटाई कर दी। हालांकि यह बिल्कुल सत्य नहीं हो सकता। इस घटना की सिर्फ दो वजह नज़र आती हैं। या तो इन दलित परिवारों को चुनावी पेमेंट नहीं हुआ है, या फिर इनके शरीर पर चढ़ी देखकर पुलिस को ख़्याल आया होगा, हे ससुरा! झोले का राशन ठूंस कर मुटिया रही हैं और फिर भी वोट डालने के पैसे वसूल किए। राम राज्य में कोई इस तरह का भ्रष्टाचार करके बच नहीं सकता। शाबाश यूपी पुलिस :)

उत्तर प्रदेश में न्याय की उम्मीद खत्म...सुल्तानपुर जिले के एडीजे(अपर जिला जज) प्रथम मनोज शुक्ला को अपनी पैतृक जमीन बचाने...
24/03/2022

उत्तर प्रदेश में न्याय की उम्मीद खत्म...

सुल्तानपुर जिले के एडीजे(अपर जिला जज) प्रथम मनोज शुक्ला को अपनी पैतृक जमीन बचाने के लिए जेसीबी के आगे लेटना पड़ा।

जज साहब का ये हाल है तो गरीबों का क्या हाल होगा उत्तर प्रदेश में..??

जोर का झटका धीरे से ...
24/03/2022

जोर का झटका धीरे से ...

हजारों क्रान्तिकारी आज भी हैं “षड्यंत्रकारी”अमन पठानभगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, अशफाकुल्लाह खान, राम प्रसाद बिस्मिल जैसे ...
23/03/2022

हजारों क्रान्तिकारी आज भी हैं “षड्यंत्रकारी”
अमन पठान
भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, अशफाकुल्लाह खान, राम प्रसाद बिस्मिल जैसे हजारों क्रान्तिकारी आज भी आज़ाद भारत के सरकारी दस्तावेजों में "षड्यंत्रकारी" ही हैं। धन्य है भारत की न्यायिक व्यवस्था और धन्यवाद के पात्र हैं भारत के लोग ...
क्या बिडम्बना है स्वतंत्र भारत में मातृभूमि की सुरक्षा, शांति व्यवस्था को नेस्त्नाबुद करने वाला अपराधी मसलन अफज़ल गुरु, अजमल कसाब भी भारतीय दण्ड संहिता में "कन्स्पिरेटर" है, और भारत को स्वतंत्र करने में अपने जीवन की बलि देने वाले स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी भी "कन्स्पिरेटर"?
आखिर भारतीय दंड संहिता तो अंग्रेजी हुकूमत के दौरान ही बनी थी, उनके हित के लिए। आज तो हम स्वतंत्र हैं। आज तो इन क्रांतिकारियों का नाम भारत के न्यायिक प्रणाली और सरकारी दस्तावेजों में एक "षड्यंत्रकारी के रूप में लिखा नहीं होना चाहिए।
कभी सोचा है जिन क्रांतिकारियों और शहीदों ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी, स्वतंत्र भारत की दंड संहिता या न्यायिक व्यवस्था से जुड़े सभी कानूनों के अधीन आज भी "कन्स्पिरेटर" ही हैं। यदि भारतीय दंड संहिता (आई.पी.सी.) की उत्पत्ति पर ध्यान दें तो देख जाता है की मुग़ल शासन काल में हिन्दू अधिनियमों को लागु करने के लिए "शरिया" की व्यवस्था थी। मुग़ल साम्राज्य के पतन और अंग्रेजी हुकूमत के भारतीय जमीं पर अभ्युदय के साथ ही अंग्रेजी अपराध कानून हावी होने लगा। इस्लामिक कानून व्यवस्था ने भारतीय सब-कंटीनेंट में अंग्रेजी कानून व्यवस्था को मजबूत करने में बहुत हद तक मदद की।
सन १८६० के पहले तक अंग्रेजी कानून व्यवस्था में बहुत सारे परिवर्तन किये गए जिसे बम्बई, कलकत्ता और मद्रास प्रेसिडेंसी-शहरों के माध्यम से लागु किया जाता था। भारतीय दंड संहिता बनने की प्रक्रिया थॉमस बबिन्ग्तन मेकॉले की अध्यक्षता में फर्स्ट लॉ कमीशन के साथ हुआ। इस कानून में नेपोलिअनिक कोड और एडवर्ड लिविंग्स्टन सिविल कोड, १८२५ को भी मद्दे नजर रखा गया।
भारतीय दंड संहिता का पहला फाइनल ड्राफ्ट सन १८३७ में तत्कालीन गवर्नर-जेनेरल ऑफ़ इंडिया को प्रस्तुत किया गया। इस ड्राफ्ट में पुनः संसोधन किये गए और १८५० में इसे पूरा कर लिया गया। छह साल बाद सन १८५६ में इसे लेजिस्लेटिव अस्सेम्ब्ली में प्रस्तुत किया गया। लेकिन यह क्रियान्वित उस समय तक नहीं हो पाया। जब तक भारत का प्रथम स्वतंत्रता आन्दोलन का बिगुल १८५७ में नहीं बजा। क्रियान्वित होने के पहले तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत को इस नियमो से कोई हानि न हो और भारतीय सब-कंटीनेंट में उनका वर्चस्व कायम रहे, इन नियमों को बार्नेस पिकोक की नज़रों से गुजरना पड़ा था। बार्नेस पिकोक को बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश भी बनाया गया। अंत में ६ अक्तूबर, १८६० को यह नियम लेजिस्लेटिव असेंबली से पास हुआ और पहली जनवरी १८६२ से लागु हुआ। क्रियान्वयन के समय भारतीय दंड संहिता को २३ अध्याय में विभाजित किया गया, जिसमे ५११ सेक्शन बनाये गए। जिसमे अन्यान्य प्रकार के अपराधों के दंड प्रक्रियाओं को दर्शाया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारतीय दंड संहिता में अनेकों बार अमेंडमेंटस किये गए चाहे महिलाओं पर अत्याचार से सम्बंधित दंड का मामला हो या अन्य।
देश में सशक्त कानून व्यवस्था के लिए जब तब २० लॉ कमीशन भी बने जिन्होंने विभिन्न मुद्दों पर भारत सरकार को अपनी-अपनी सिफरिशें भी दी, सरकार ने उन सिफारिशों के मद्देनजर कानूनों में परिवर्तन भी किये। परन्तु, किसी ने भी इस बात की ओर ध्यान नहीं दिया, या यूँ कहें, देना उचित नहीं समझा कि "अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भारत में जो कानून भारतीय क्रांतिकारियों पर लगा और उसके तहत उसे दण्डित किया गया। मसलन क्रांतिकारियों के खिलाफ सरकार के विरुद्ध कांस्पीरेसी का मामला लें। वह तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत और अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध था। जो भारत-भूमि पर राज्य कर रहे थे। इन क्रांतिकारियों का दोष यह था कि वे सभी अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए विभिन्न प्रकार के तरीके अपना रहे थे। जो तत्कालीन व्यवस्था के अनुकूल नहीं थे। उन्ही नियमों के अनुरूप हजारों क्रातिकारियों को सजा मिली। जेल की यातनाएं दी गयीं। सैकड़ों फांसी पर लटकाए गए। लेकिन आज तो देश स्वतंत्र है।
आज "अफज़ल गुरु, अजमल कसाब को भी उसी भारतीय दंड संहिता के तहत दण्डित किया गया, जिसके तहत मंगल पाण्डेय, तात्या टोपे, ठाकुर दुर्गा सिंह, उधम सिंह, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त, अशफाकुल्लाह खान, बसंत बिस्वास, खुदीराम बोस, मदनलाल ढींगरा, मास्टर आमिर, राम प्रसाद बिस्मिल, बाजी राउत, सूर्य सेन, अब्दुल कादिर, मीर अली, जैसे हजारों क्रांतिकारी फांसी के फंदे पर लटकाए गए। मैं कोई विधि-ज्ञाता, विधि-विशेषज्ञ नहीं हूँ। भारत का एक नागरिक हूँ और अपनी मातृभूमि से बेहद प्यार करता हूँ। मुझे इतना जानने का अधिकार तो अवश्य है (क्योकि मैं अपने कर्तव्य का निर्वाह भली-भांति कर रहा हूँ) कि क्या इन क्रांतिकारियों और अफज़ल गुरु या फिर अजमल कसाब में कुछ तो अंतर है? उनके क्रिया-कलापों में कुछ तो भिन्नता है? कानून की नजर में दोनों एक समान कैसे हो सकते हैं और वह भी १५२ साल पुराना कानून, जिसे अंग्रेजों ने अपने हित के लिए १८५७ का गदर कुचलने के लिए बनाया था? सन १९४७ में भारत में लोगों की संख्या महज २७ करोड़ थी। आज १३० करोड़ से भी अधिक हैं। क्या इन १३० करोड़ लोगों के दिलों में अपने स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों के लिए कोई स्नेह नहीं है? क्या उनकी नजर में वे वैसे ही दोषी हैं जैसे अफज़ल गुरु या अजमल कसाब ? यदि नहीं, तो भारत की अवाम को सरकार से कहना चाहिए कि वे "स्वतंत्रता संग्राम के सभी क्रांतिकारियों, शहीदों को जिन नियमों और संहिता के अधीन दण्डित किया गया था, उनमे उनके विरुद्ध इस्तेमाल किये गए "कांस्पीरेसी" शब्द को "निरस्त" करे. शायद यह बहुत बड़ा सम्मान होगा, बहुत बड़ी श्रद्धांजलि होगी उन शहीदों के प्रति."

ये 2011 का ट्वीट है .. मतलब ईरानी जी के अनुसार मोदी जी की सरकार आम आदमी की नहीं अमीर लोगों की है.इधर कांग्रेस में राहुल ...
23/03/2022

ये 2011 का ट्वीट है .. मतलब ईरानी जी के अनुसार मोदी जी की सरकार आम आदमी की नहीं अमीर लोगों की है.

इधर कांग्रेस में राहुल -सोनिया धरना करेंगे नहीं ..और दूसरे को कमान देंगे नहीं ..

बाबा लाएंगे क्रांति, मुबारक यूपी
22/03/2022

बाबा लाएंगे क्रांति, मुबारक यूपी

प्रधान सेवक के साथ कश्मीरी पंडितों के पलायन के समय यानी 1990 के वक्त देश के गृह मंत्री रहे मुफ़्ती मोहम्मद सईद हैं। विवे...
21/03/2022

प्रधान सेवक के साथ कश्मीरी पंडितों के पलायन के समय यानी 1990 के वक्त देश के गृह मंत्री रहे मुफ़्ती मोहम्मद सईद हैं। विवेक लंपट ने फ़िल्म में यह फोटो नही जोड़ी। बताना चाहिए था कि सईद ने प्रधान के साथ जम्मू-कश्मीर में 2015-2018 के दौरान सरकार चलाई।

Movie 💽 coming soon 👇😃🤣🤣🤣
20/03/2022

Movie 💽 coming soon 👇😃🤣🤣🤣

भक्त भाइयों को जानकारी कम है वह अपनी जानकारी दुरुस्त कर लेंफिल्म "काश्मीर फाइल्स" 1980-90 के दशक की घटनाओं पर आधारित हैं...
20/03/2022

भक्त भाइयों को जानकारी कम है वह अपनी जानकारी दुरुस्त कर लें
फिल्म "काश्मीर फाइल्स" 1980-90 के दशक की घटनाओं पर आधारित हैं।
उसमें एक जगह अनुपम खेर एक ग्रोसर से कुछ सब्जियां खरीदते हैं और एक बड़ा नोट देते हैं, सब्जी वाला अनुपम खेर को बाकी बचे पैसे वापिस करता हैं। तभी अनुपम खेर कहते हैं कि
"नोट पर जिन्ना की जगह गांधी का फोटो क्यों नहीं है?"
मजे की बात तो यह हैं कि "गांधी छाप" वाले नोट 1996 में जारी हुए, 1996 से पहले गांधी की जगह अशोक स्तंभ होता था
आएगा तो मोदी ही 😄😄

अरे हरामखोरों कोई भारत का दामाद कैसे बन सकता है? भास्कर के मालिकों का दामाद बना हो तो बात अलग है। देखिए, यह लेवल है पत्र...
19/03/2022

अरे हरामखोरों कोई भारत का दामाद कैसे बन सकता है? भास्कर के मालिकों का दामाद बना हो तो बात अलग है। देखिए, यह लेवल है पत्रकारिता का।

कश्मीर फाइल्स देखने निकला भारत।
19/03/2022

कश्मीर फाइल्स देखने निकला भारत।

19/03/2022

बुरा मानो होली है।
हम अपनी ख़ुशी के लिए दूसरों की ख़ुशियाँ कैसे बर्बाद कर सकते है?
ख़ुशियों का त्यौहार दूसरों के लिए कैसे ग़म का त्यौहार बन जाता है पता नही चलता।
बेहद दुःखद

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी को सोचना और समझना चाहिये या सिर्फ और सिर्फ  इस्तेमाल कर रहे हैं...
19/03/2022

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी को सोचना और समझना चाहिये या सिर्फ और सिर्फ इस्तेमाल कर रहे हैं ।क्या मुसलमानों के लिए आपकी पार्टी में एमएलसी उम्मीदवार 2 लोग ही मिले हैं 20 परसेन्ट में या टिकट नही देना चाहते ।अब तो आपको सोच कर फ़ैसले लेने होंगे ।

क्या कर लेंगे भाई, हम- आप, बेचने दीजिये।
19/03/2022

क्या कर लेंगे भाई, हम- आप, बेचने दीजिये।

कश्मीर फाइल के बाद सिस्टम फाइल भी जरूर देखे ।।आपके आसपास ही दिख जाएगी
19/03/2022

कश्मीर फाइल के बाद सिस्टम फाइल भी जरूर देखे ।।
आपके आसपास ही दिख जाएगी

ये 4 न्यूज़ चैनल खुद को नम्बर 1 होने का दावा कर रहे हैंआखिर नम्बर 1 न्यूज़ चैनल तो एक ही होता है लेकिन चार चैनल नम्बर 1 कै...
18/03/2022

ये 4 न्यूज़ चैनल खुद को नम्बर 1 होने का दावा कर रहे हैं

आखिर नम्बर 1 न्यूज़ चैनल तो एक ही होता है लेकिन चार चैनल नम्बर 1 कैसे हो गए?

अरे हां "मोदी है तो मुमकिन है"

होली पर मुफ़्त सिलेंडर आएगा या नहीं? नहीं आएगा, तो मुफ़्त अनाज को पकाएंगे कैसे? यूपी सरकार जीत के बाद पलट गई। होली और दीवा...
18/03/2022

होली पर मुफ़्त सिलेंडर आएगा या नहीं?
नहीं आएगा, तो मुफ़्त अनाज को पकाएंगे कैसे?
यूपी सरकार जीत के बाद पलट गई।
होली और दीवाली ही तो हिंदुओं के दो प्रमुख त्योहार होते हैं।
खैर, वोट दिया है तो कुछ सोचकर ही दिया होगा। 😂😂

This all movies have to show coz its bigger than
17/03/2022

This all movies have to show coz its bigger than

चलिए एक यथार्थ बताते हैं। एक आरटीआई के जवाब में भारत सरकार की कश्मीर पुलिस कहती है कि आतंकवाद की वजह से कश्मीर में 89 कश...
15/03/2022

चलिए एक यथार्थ बताते हैं। एक आरटीआई के जवाब में भारत सरकार की कश्मीर पुलिस कहती है कि आतंकवाद की वजह से कश्मीर में 89 कश्मीरी पंडित मारे गए जबकि 1635 जो मारे गए वह दूसरे धर्म के थे।

कश्मीर फाइल्स के नाम पर बनी फिल्म आजकल चर्चाओं में है।मेरे आज तक यह समझ नहीं आया कि कोई बिना संघर्ष के कैसे अपनी विरासत ...
15/03/2022

कश्मीर फाइल्स के नाम पर बनी फिल्म आजकल चर्चाओं में है।

मेरे आज तक यह समझ नहीं आया कि कोई बिना संघर्ष के कैसे अपनी विरासत छोड़कर भाग सकता है!

किसानों की जमीनों पर आंच आई तो 13 महीने तक सब कुछ त्यागकर दिल्ली के बॉर्डर पर पड़े रहे।

कश्मीर घाटी में आज भी जाट-गुर्जर खेती कर रहे है।पीड़ित होने का रोना-धोना आजतक दिल्ली जंतर/मंतर आकर नहीं किया है।

1967 के बाद से देश के बारह राज्यों में आदिवासियों को चुन-चुनकर मारा जा रहा है और कारण इतना ही बताया जाता है कि विकास के रास्ते में रोड़ा बनने वाले नक्सली लोगों को निपटाया जा रहा है!

आदिवासियों का नरसंहार कभी चर्चा का विषय नहीं बनता है।उनके विस्थापन का दर्द,पुनर्वास की योजनाओं पर कोई विमर्श नहीं होता।

सुविधा के लिए बता दूँ कि 1989 तक कश्मीरी पंडित बहुत खुश थे और हर क्षेत्र में महाजन बने हुए थे।

अचानक दिल्ली में बीजेपी समर्थित सरकार आती है और राज्य सरकार को बर्खास्त करके जगमोहन को राज्यपाल बना दिया जाता है।

कश्मीरी पंडितों पर जुल्म हुए और दिल्ली की तरफ प्रस्थान किया गया!

उसके बाद बीजेपी ने कश्मीरी पंडितों का मुद्दा मुसलमानों को विलेन साबित करने के लिए राष्ट्रीय मुद्दा बना लिया!

कांग्रेस सरकार ने जमकर इस मुद्दे को निपटाने के लिए सालाना खरबों के पैकेज दिए और जितने भी कश्मीरी पंडित पलायन करके आये उनको एलीट क्लास में स्थापित कर दिया।

साल में एक बार जंतर-मंतर पर आते,बीजेपी के सहयोग से ब्लैकमेल करते और हफ्ता वसूली लेकर निकल लेते थे।

8 साल से केंद्र में बीजेपी की प्रचंड बहुमत की सरकार है व कश्मीर से धारा 370 हटा चुके है लेकिन कश्मीरी पंडित वापिस कश्मीर में स्थापित नहीं हो पा रहे है!

धरने-प्रदर्शन से निकलकर हफ्तावसूली की गैंग फिल्में बनाकर पूरे देश को इमोशनल ब्लैकमेल करके वसूली का नया तरीका ईजाद कर चुकी है!

आदिवासी रोज अपनी विरासत को बचाने के लिए चूहों की तरह मारे जा रहे है लेकिन कभी संज्ञान नहीं लिया जाता।आज किसान कौमों को विभिन्न तरीकों से मारा जा रहा है लेकिन कोई चर्चा नहीं होती।

1995 के बाद से आज तक तकरीबन 15 लाख किसान व्यवस्था की दरिंदगी से तंग आकर आत्महत्या कर चुके है लेकिन पिछले 25 सालों में एक भी बार जंतर-मंतर पर कोई धरना नहीं हुआ,राष्ट्रीय मीडिया में विमर्श का विषय नहीं बना और केंद्र सरकार की तरफ से चवन्नी भी राहत पैकेज के रूप में नहीं मिली।

भागलपुर,पूर्णिया,गोदरा के दंगों से भी पलायन हुआ व देश के सैंकड़ों नागरिक मारे गए।मुजफरनगर नगर फाइल्स या हरियाणा जाट आरक्षण पर हरियाणा फाइल्स भी बननी चाहिए!

हर नागरिक की मौत का संज्ञान लिया जाना चाहिए।एक नागरिक की जान अडानी-अंबानी की संपदा से 100 गुणा कीमती है।हफ्ता-वसूली की यह मंडी अब खत्म होनी चाहिए।भावुक अत्याचारों का धंधा कब तक चलाया जाएगा?

किसान कौम के बच्चे बंदूक लेकर इनके घरों की सुरक्षा के लिए खड़े हो तब ये लोग बंगलों में जाएंगे!क्यों देश इनका नहीं है क्या?ये नागरिक के बजाय राष्ट्रीय दामाद क्यों बनना चाहते है?

भारत सरकार संसाधन दे रही है आर्मी तैनात है तो डर किससे है?जिससे खतरा है उनके खिलाफ लड़ो!जाट-गुज्जर कश्मीर घाटी में आज भी रह-रहे है उन्होंने कभी असुरक्षा को लेकर रोना-धोना नहीं किया है।

Note:- तथाकथित राष्ट्रवादियों से निवेदन है कि एक बार हरियाणा जाट आरक्षण आंदोलन पर बनी फिल्म चीरहरण को देख लीजिए या आदिवासियों पर बनी फिल्म चक्रव्यूह देख लीजिए हिन्दू होने का भूत उतर जाएगा..!

साभार:~ प्रेमसिंह सियाग

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