09/01/2026
अवैध बजरी डम्पर से हादसा, और मां-बाप की जिंदगी में कभी न भरने वाला सन्नाटा” एक बेटे की मौत दूसरा जिंदगी और मौत से लड़ रहा जंग
*रिपोर्ट ITS TONI OFFICIAL*
*लेसवा ग्राम की सड़क पर जो हुआ, वह सिर्फ हादसा नहीं था**वह एक मां की कोख पर चला पत्थर था, *एक पिता की जिंदगी भर की मेहनत पर चला डंपर था**गोविंदगढ़ निवासी अभिषेक सैन रोज़ की तरह घर से निकले थे। यह सोचकर कि शाम को लौटेंगे*, *कुछ पैसे लाएंगे, घर का चूल्हा जलेगा*। *लेकिन किसे पता था कि वही रास्ता उन्हें हमेशा के लिए घर से छीन लेगा। बजरी से भरा बेकाबू डंपर पलटा और चंद सेकंड में एक जवान सांसें थम गईं।*
*बाइक पर साथ चल रहे छोटे भाई आशीष सैन मौत से जूझ रहे हैं। हर सांस भारी है, हर पल अनिश्चित।
*अस्पताल में बैठे परिजन भगवान से भीख मांग रहे हैं*
*“एक बेटा तो बचा लो*
पिता गोविंदगढ़ मेंपरिवार की आजीविका का एकमात्र साधन—छोटी सैलून दुकान” चलाते हैं। उसी दुकान की कमाई से दोनों बेटों को पाला, बड़ा किया। दोनों भाई पुष्कर में हैंडीक्राफ्ट की दुकान पर काम करते थे। बेहद सामान्य परिवार—न कोई सिफारिश, न कोई ताकत। बस मेहनत और उम्मीद।
हादसे की खबर सुनते ही मां घर पर ही टूट गई। वह मोर्चरी तक नहीं आ सकी। घर के एक कोने में बेसुध पड़ी मां अब भी यही पूछ रही है—
“मेरा अभिषेक कब आएगा?”
कौन बताए उस मां को कि उसका लाल अब कभी दरवाज़ा नहीं खटखटाएगा… कभी “मां” नहीं पुकारेगा।
उधर पुष्कर उप जिला चिकित्सालय की मोर्चरी के बाहर परिजन पत्थर बने बैठे हैं। किसी की आंखों से आंसू सूख चुके हैं, किसी की हिम्मत जवाब दे चुकी है। सन्नाटा ऐसा कि दिल बैठ जाए। हर चेहरा सवाल कर रहा है—
गरीब होना क्या इतना बड़ा गुनाह है?
स्थानीय लोग साफ कह रहे हैं—यह मौत बजरी माफियाओं की बेलगाम रफ्तार की है।
*अंधाधुंध दौड़ते डंपर, न नियम, न डर। आज फिर वही हुआ
डंपर चला, सिस्टम चुप रहा… और एक घर उजड़ गया।
*आज उस घर में*
*मां की गोद सूनी है,*
*पिता की कमर टूट चुकी है,*
*एक बेटा दुनिया छोड़ चुका है,*
*दूसरा मौत से लड़ रहा है*
*यह खबर पढ़ते वक्त अगर आंखें नम न हों,
तो समझ लेना*
*हम इंसान नहीं, *पत्थर हो चुके हैं*
*रिपोर्ट ITS TONI OFFICIAL*
रिपोर्टर फर्स्ट इंडिया न्यूज राजस्थान