Abhinav Pandey Live

  • Home
  • Abhinav Pandey Live

Abhinav Pandey Live Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Abhinav Pandey Live, News & Media Website, .

ऑनलाइन विज्ञापन हेतु संपर्क करें 9956223439,9506082523
harshodaytimesहिंदी समाचार पत्र हर्षोदय टाइम्स के स्वामित्व व उसके अधीन का सोशल मीडिया डिजिटल प्लेटफार्म है। हमारा उद्देश्य रोचक अंदाज में सच लोगों तक पहुंचाना है।

17/08/2025

कभी हार नहीं मानना चाहिए, पता नहीं ऊपरवाले ने किसके नसीब में क्या लिखा है ❤️😊👍💪

सादगी और संघर्ष की अमूल्य तस्वीरसुबह की प्रार्थना सभा में खड़ी यह नन्हीं बच्ची अपनी जेब में एक रोटी लेकर आई है।शायद घर म...
17/08/2025

सादगी और संघर्ष की अमूल्य तस्वीर

सुबह की प्रार्थना सभा में खड़ी यह नन्हीं बच्ची अपनी जेब में एक रोटी लेकर आई है।
शायद घर में टिफिन नहीं था, या माँ ने अपने प्यार से वही रोटी थमा दी।

यह दृश्य भूख, मासूमियत और उम्मीद का अद्भुत संगम है, जो सीधा दिल को छू जाता है।
कभी-कभी जीवन की सच्चाई किसी किताब या बड़े शब्दों में नहीं, बल्कि ऐसी छोटी-सी तस्वीर में छिपी होती है।

यही है असली ज़िंदगी की सादगी और संघर्ष—
जहाँ प्यार ही सबसे बड़ा सहारा है और उम्मीद ही सबसे बड़ा धन।@ #

ये पौधा स्वयं ईश्वर का दूसरा स्वरूप है, स्वयं नष्ट हो जाएगा लेकिन आपको ये 5 कष्ट से बचा लेगा .....मदार, जिसे आम बोलचाल म...
15/08/2025

ये पौधा स्वयं ईश्वर का दूसरा स्वरूप है, स्वयं नष्ट हो जाएगा लेकिन आपको ये 5 कष्ट से बचा लेगा .....

मदार, जिसे आम बोलचाल में आक का पौधा कहा जाता है, एक ऐसा चमत्कारी पौधा है जिसे भगवान शिव और गणेश जी की पूजा में महत्वपूर्ण माना गया है। यह पौधा न केवल धार्मिक दृष्टि से खास है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी अनमोल हैं।

मदार के पौधे के दो प्रकार होते हैं - एक जिसमें बैंगनी फूल होते हैं और दूसरा जिसमें सफेद फूल होते हैं। सफेद फूलों वाले पौधे का आयुर्वेद में विशेष उपयोग किया जाता है।

धार्मिक महत्व

माना जाता है कि सफेद आक की जड़ को बुधवार या सोमवार के दिन पूजा करके चांदी की ताबीज में धारण करने से बुध ग्रह की पीड़ा दूर होती है और व्यक्ति की बुद्धि तेज हो जाती है। इसके अलावा, 113 साल पुराने आक के पौधे की जड़ें अक्सर गणेश जी के स्वरूप में बदल जाती हैं, जिनकी पूजा करने से सुख-समृद्धि मिलती है।

औषधीय गुण

जोड़ों के दर्द के लिए रामबाण
अगर आपके घर में किसी बुजुर्ग को जोड़ों में दर्द की समस्या है, तो मदार के पत्तों का प्रयोग करें। इसके लिए ताजे पत्तों को हल्की आंच पर गर्म करके दर्द वाले स्थान पर बांधें। इससे दर्द में तुरंत राहत मिलती है। आप पत्तों पर सरसों का तेल लगाकर भी इसे गर्म करके उपयोग कर सकते हैं।

त्वचा रोगों के लिए फायदेमंद
मदार के दूध में एंटी-फंगल गुण होते हैं। इसे हल्दी के साथ मिलाकर दाद, खाज, खुजली, फंगल इन्फेक्शन और एग्जिमा जैसी समस्याओं पर लगाने से लाभ मिलता है।

बवासीर का इलाज
अगर किसी को बवासीर की समस्या है, तो मदार के दूध में हल्दी मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लगाएं। नियमित उपयोग से 7-10 दिनों में छोटे मस्से ठीक हो जाते हैं, जबकि बड़े मस्सों के लिए एक महीने तक यह उपचार करना पड़ता है। यह ऑपरेशन से बेहतर और सुरक्षित उपाय माना जाता है।

दांत दर्द में राहत
दांत दर्द की समस्या में मदार के दूध को मसूड़ों पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है। यह पुराने समय से गांवों में इस्तेमाल किया जाने वाला कारगर घरेलू नुस्खा है।

बांझपन का इलाज
आयुर्वेद में बांझपन की समस्या को दूर करने के लिए भी आक के पत्तों का उपयोग किया जाता है। हालाँकि, इसका उपयोग किसी अनुभवी वैद्य की सलाह से ही करना चाहिए।

सावधानी

मदार के पौधे के दूध में जहरीले तत्व होते हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं को इस पौधे से दूर रहना चाहिए क्योंकि इसका दूध गर्भपात कर सकता है।

निष्कर्ष

मदार का पौधा अपनी धार्मिक और औषधीय खूबियों के लिए विशेष महत्व रखता है। यदि इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह कई गंभीर बीमारियों का इलाज करने में सहायक हो सकता है।

ध्यान दें: इस पौधे का प्रयोग किसी विशेषज्ञ की सलाह से ही करें, ताकि कोई हानि न हो।

हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. ईश्वर स्वरूप मदार का पौधा: धार्मिक आस्था और अद्भुत औषधीय गुणों का खजाना

मदार, जिसे आम बोलचाल में आक का पौधा कहा जाता है, भारतीय परंपरा में न केवल एक पौधा, बल्कि ईश्वर का दूसरा स्वरूप माना गया है। यह अद्भुत वनस्पति स्वयं नष्ट हो जाने के बावजूद अपने स्पर्श और उपयोग से मनुष्य को अनेक कष्टों से बचाने में सक्षम है। हिंदू धर्म में विशेष रूप से भगवान शिव और गणेश जी की पूजा में इसका महत्व अद्वितीय है। साथ ही, इसके औषधीय गुण आयुर्वेद में अनमोल धरोहर के रूप में वर्णित हैं।

मदार के प्रकार

मदार के पौधे के मुख्यतः दो प्रकार पाए जाते हैं —

1. बैंगनी फूल वाला मदार

2. सफेद फूल वाला मदार
आयुर्वेदिक दृष्टि से सफेद फूल वाला मदार अधिक औषधीय महत्व रखता है।

धार्मिक महत्व

बुध ग्रह की पीड़ा से मुक्ति – सफेद आक की जड़ को बुधवार या सोमवार के दिन विधिपूर्वक पूजा कर चांदी की ताबीज में धारण करने से बुध ग्रह से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और बुद्धि प्रखर होती है।

गणेश स्वरूप जड़ें – 113 वर्ष पुराने आक के पौधे की जड़ें प्रायः गणेश जी के स्वरूप में बदल जाती हैं। इनकी पूजा करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

औषधीय गुण और घरेलू उपयोग

1. जोड़ों के दर्द में रामबाण

ताजे पत्तों को हल्की आंच पर गर्म करके दर्द वाले स्थान पर बांधने से तुरंत राहत मिलती है।

सरसों का तेल लगाकर पत्तों को गर्म करने के बाद लगाने से प्रभाव दोगुना हो जाता है।

2. त्वचा रोगों में लाभकारी

मदार के दूध में प्राकृतिक एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं।

इसे हल्दी के साथ मिलाकर दाद, खाज, खुजली, फंगल इन्फेक्शन और एग्जिमा में लगाने से लाभ मिलता है।

3. बवासीर का उपचार

मदार के दूध में हल्दी मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से 7–10 दिनों में छोटे मस्से ठीक हो जाते हैं।

बड़े मस्सों के लिए यह उपचार एक महीने तक करना पड़ता है, जिसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता है।

4. दांत दर्द में त्वरित राहत

मसूड़ों पर मदार के दूध की हल्की मात्रा लगाने से दांत दर्द में तुरंत आराम मिलता है। यह नुस्खा ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी प्रचलित है।

5. बांझपन में सहायक

आयुर्वेद में बांझपन की समस्या के उपचार में भी आक के पत्तों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इसे केवल अनुभवी वैद्य की देखरेख में ही करना चाहिए।

सावधानियां

मदार के दूध में जहरीले तत्व होते हैं, इसलिए इसका प्रयोग बिना विशेषज्ञ की सलाह के न करें।

गर्भवती महिलाओं को इस पौधे से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इसका दूध गर्भपात का कारण बन सकता है।

निष्कर्ष

मदार का पौधा धार्मिक आस्था और औषधीय महत्व का अद्वितीय संगम है। यदि इसके प्रयोग में सावधानी और विशेषज्ञ की सलाह का पालन किया जाए, तो यह पौधा अनेक गंभीर बीमारियों और समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक हो सकता है।

13/08/2025

जानिए आखिर क्यों नहीं मनाती थी कुशीनगर पुलिस जनमाष्टमी का त्योहार जनपद सृजन के पहले वर्ष 1994 में 31

  काशी विश्वनाथ धाम बना प्लास्टिक मुक्त: स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम #वाराणसी। स्वच्छता और पर्...
11/08/2025

काशी विश्वनाथ धाम बना प्लास्टिक मुक्त: स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम

#वाराणसी। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 11 अगस्त से काशी विश्वनाथ धाम को औपचारिक रूप से प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।

इससे पूर्व भी मंदिर प्रशासन द्वारा जनजागरूकता अभियान चलाकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से प्लास्टिक के उपयोग से बचने की अपील की गई थी। अब इस फैसले के तहत किसी भी प्रकार का प्लास्टिक उत्पाद—चाहे वह थैला हो, बोतल हो या कोई अन्य सामग्री—मंदिर परिसर में लाना प्रतिबंधित होगा।

विशेष रूप से, पूजा सामग्री के साथ भी यदि प्लास्टिक का कोई सामान पाया गया, तो उसे मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य न केवल धाम की स्वच्छता बनाए रखना है, बल्कि गंगा और आसपास के पर्यावरण को भी प्रदूषण से बचाना है।

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से इस अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह कदम काशी की आध्यात्मिक गरिमा और प्राकृतिक सौंदर्य को सुरक्षित रखने में मील का पत्थर साबित होगा।

Varanasi Prayagraj Live

 #काकोरी रेल एक्शन की वर्षगांठ पर शत-शत नमनक्रांतिकारियों के अदम्य साहस और बलिदान को स्मरणआज हम उस ऐतिहासिक घटना की वर्ष...
09/08/2025

#काकोरी रेल एक्शन की वर्षगांठ पर शत-शत नमन
क्रांतिकारियों के अदम्य साहस और बलिदान को स्मरण

आज हम उस ऐतिहासिक घटना की वर्षगांठ मना रहे हैं जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव तक हिला दी थी—काकोरी रेल एक्शन। यह केवल एक डकैती नहीं थी, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में दर्ज एक साहसिक क्रांतिकारी अभियान था, जिसने पूरे देश के युवाओं के हृदय में स्वतंत्रता की ज्वाला प्रज्वलित कर दी।

9 अगस्त 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक़ उल्ला खाँ, राजेंद्र लाहिड़ी, चंद्रशेखर आज़ाद, सचिंद्रनाथ बक्शी सहित अनेक अमर वीरों ने काकोरी के पास चलती ट्रेन को रोककर ब्रिटिश सरकार का ख़जाना कब्ज़े में ले लिया। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि आज़ादी की लड़ाई के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना था।

इस घटना के बाद ब्रिटिश हुकूमत बौखला उठी। अनेक वीरों को फाँसी दी गई, कई को आजीवन कारावास। परन्तु इन सपूतों ने फाँसी के फंदे को भी हँसते-हँसते गले लगाया और दुनिया को यह संदेश दिया कि "राष्ट्र सर्वोपरि है, शेष सब तुच्छ"।

माँ भारती के इन अमर सपूतों का त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम सदैव हमें ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा। आज की युवा पीढ़ी के लिए यह शौर्य गाथा एक दीपस्तंभ है, जो हमें याद दिलाती है कि स्वतंत्रता हमें कितने बलिदानों के बाद प्राप्त हुई है।

आइए, इस अवसर पर हम संकल्प लें कि इन महावीरों के आदर्शों पर चलकर अपने देश की एकता, अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा करेंगे।

शत-शत नमन उन सभी वीरों को, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर माँ भारती के सम्मान को ऊँचा किया।

Address


Telephone

+919506082523

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Abhinav Pandey Live posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

  • Want your business to be the top-listed Media Company?

Share