“हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा” | हीरा नगरी से राजभाषा की कीर्ति यश पताका लहराते हम हैं सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान | राजभाषा प्रकोष्ठ या लोकप्रिय शब्दों में ‘हिन्दी सेल’ संस्थान के सर्वांगीण उत्थान में राजभाषा हिन्दी की भूमिका को प्रोत्साहित करने में अहर्निश प्रयासरत है | स्वतंत्रता के उपरांत दिनाँक १४ सितम्बर १९४९ को भारत की संविधान सभा ने हिन्दी को भारत संघ की राजभाष
ा के रूप में स्वीकार किया | संविधान के अनुच्छेद ३४३ के अनुसार संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी है | अतः प्रशासनिक, शैक्षणिक तथा सामाजिक क्षेत्र में हिन्दी के प्रचार-प्रसार तथा प्रचलन के वृद्धि की सुनिश्चितता को तत्पर हमने राष्ट्र-पटल पर एक अलग पहचान बनाई है | संस्थान के निदेशक महोदय की अध्यक्षता में अध्यापकों की कार्यकारिणी, छात्र कार्यान्वयन समिति की मदद से इस प्रकोष्ठ का संचालन करती है | हम प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस की सावधिक पत्रिका “सम्मुख” का लोकार्पण करते हैं | साथ ही हिन्दी पखवाड़ा का आयोजन किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताओं में छात्र, अध्यापक एवं कर्मचारी स्तर पर स्पर्धाएँ होती हैं जो हिन्दी दिवस की शाम कवि सम्मेलन के साथ समाप्त होता है | इसके अलावा समय-समय पर हिन्दी प्रशिक्षण, हिन्दी सॉफ्टवेयर तथा टाइपिंग प्रशिक्षण आदि गतिविधियाँ होती रहती हैं | प्रौद्योगिकी, विज्ञान, राष्ट्रीय एवं सामाजिक विषयों पर भी सेमिनार तथा कार्यशालाएँ आयोजित की जाती है | जनसम्पर्क तथा तकनीकी में हिन्दी के प्रश्रय को प्रतिबद्ध हमारे संस्थान को कई संगठनों ने सम्मानित भी किया है | कुल मिलाकर अभियांत्रिकी में अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव से इतर राजभाषा हिन्दी की गरिमा बढ़ाने में सफल हम एक ओर जहाँ छात्र अध्याय की भूमिका निभाते हैं तो दूसरी ओर प्रशासनिक तथा संचार व्यवस्था को हिन्दी अनुकूल बनाने में हमारा अहम सहयोग रहता है | हमारे संस्थान ने तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी में कई बुलंदियों के झंडे गाड़े हैं और गुजरात तथा सूरत, देश के विकास का अग्रणी सारथी रहा है | एक राष्ट्रीय संस्थान होने के नाते राजभाषा के प्रचार-प्रसार में हम कुछ ऐसे ही उद्देश्यों के साथ आगे बढ़ रहे हैं |