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28/09/2025

Hanuman Exposed | हनुमान पहले अंतरिक्ष यात्री थे? | अरुण गुप्ता ने अनुराग ठाकुर का खींचा खाल | Andhvishwas Hatao Desh Bachao

25/09/2025

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें वो सारे अधिकार दिलाए जिनसे सदियों तक वंचित रखा गया था। इस प्रेरणादायक भाषण में दिलीप यादव (पेरियार) बताते हैं कि कैसे हमारे पूर्वजों को जूते-चप्पल पहनने, शिक्षा पाने, पानी पीने और वेद पढ़ने तक का हक नहीं था। शूद्र कहकर हमें अछूत बनाया गया, समाज से अलग रखा गया। लेकिन बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने अपने संघर्ष, बलिदान और भारतीय संविधान के ज़रिए इन सब अन्यायों को खत्म किया और हमें समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय का अधिकार दिलाया। इस वीडियो को पूरा देखें और समझें कि क्यों हमें अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और बाबासाहेब के योगदान को कभी नहीं भूलना चाहिए! सब्सक्राइब करें – सामाजिक न्याय, अंबेडकर विचार और समानता की लड़ाई से जुड़ी और वीडियो के लिए।

24/09/2025

ब्राह्मण शंकराचार्य और स्वघोषित जगतगुरु रामभद्राचार्य के विवादित बयान पर बड़ा खुलासा! रामभद्राचार्य ने कहा कि आरक्षण खत्म नहीं हुआ तो गृह युद्ध होगा, आरक्षण से मेरिट का हनन होता है, ब्राह्मण 100 नंबर लाकर फेल हो जाता है और अन्य जाति का लड़का 4 नंबर लाकर कलेक्टर बन जाता है। इसी बयान पर अर्जक संघ प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता ने करारा जवाब देते हुए रामभद्राचार्य की पोल खोल दी।

अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि –
रामभद्राचार्य खुद जातिगत पुजारी परंपरा और मंदिरों में जन्मजात पंडितों के आरक्षण का लाभ उठाते हैं।
मंदिरों में पुजारी का पद पीढ़ी दर पीढ़ी सिर्फ ब्राह्मणों को देने की परंपरा असली जातिगत आरक्षण है।
आरक्षण सामाजिक न्याय और बराबरी का अधिकार है, जिसे खत्म करना संविधान और दलित-बहुजन विरोधी सोच है।

यह वीडियो रामभद्राचार्य के बयान, ब्राह्मणवादी मेरिट के मिथक और असली जातिगत विशेषाधिकार की सच्चाई सामने लाता है। देखें और समझें कैसे “मेरिट” के नाम पर पीढ़ियों से चला आ रहा ब्राह्मणिक आरक्षण छुपाया जाता है। जरूर देखें – पूरा सच और आंकड़ों के साथ!

03/09/2025

इस वीडियो में डॉक्टर विष्णु देव यादव, जो एक प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और अर्जक विचारधारा से जुड़े हुए चिंतक हैं, समाज में फैले हुए अंधविश्वास, पाखंड और मनुवादी व्यवस्था की जड़ों पर सीधा प्रहार करते हैं। डॉक्टर यादव लगातार समाज से जातिवाद, रूढ़िवाद, स्वर्ग-नरक, ईश्वर-आत्मा, भूत-प्रेत जैसी दकियानूसी धारणाओं और पाखंडपूर्ण मान्यताओं के विनाश के लिए संघर्षरत रहते हैं।

आज इस वीडियो में उन्होंने समाज के सबसे बड़े पाखंडों में से एक मृत्यु भोज, श्रद्धा क्रम, मरणोपरांत पिंडदान, मुखाग्नि, ब्राह्मण भोज, मुंडन प्रथम जैसी परंपराओं का विस्तारपूर्वक और तार्किक तरीके से पर्दाफाश किया है। डॉक्टर विष्णु देव यादव ने अपने भाषण में बताया कि किस प्रकार ये प्रथाएं समाज को कमजोर और गुलाम बनाए रखने का षड्यंत्र हैं। इन सब व्यवस्थाओं को धर्म और मोक्ष के नाम पर जनता के ऊपर थोपा गया, जबकि इनमें कहीं भी वैज्ञानिकता या तर्कसंगतता दिखाई नहीं देती।

इस वीडियो का सबसे बड़ा आकर्षण वह हिस्सा है जिसमें डॉक्टर विष्णु देव यादव ने सीधे सवाल उठाए हैं:

अगर राम भगवान थे, तो फिर राम टाइटल लगाने वाली जाति यानी चमार समाज से घृणा क्यों की जाती है?
उनके साथ भेदभाव और अछूत जैसा व्यवहार क्यों किया जाता है?
अगर राम नाम सत्य है, तो यह केवल मौत के बाद ही क्यों बोला जाता है?
शादी समारोह, शुभ मुहूर्त या खुशियों के अवसर पर राम नाम क्यों नहीं बोला जाता?
क्या वहां पर राम नाम झूठ हो जाता है?

इस भाषण में न सिर्फ इन अंधविश्वासी परंपराओं का मज़ाक उड़ाया गया है बल्कि गहराई से यह भी समझाया गया है कि समाज को आगे बढ़ने के लिए पाखंड और ब्राह्मणवादी षड्यंत्रों से मुक्त होना कितना जरूरी है।

डॉक्टर विष्णु देव यादव ने तर्क, विज्ञान और लॉजिक के आधार पर बताया कि –
✅ मृत्यु भोज परिवार को आर्थिक रूप से तोड़ता है।
✅ पिंडदान और श्राद्ध की कोई वैज्ञानिक मान्यता नहीं है।
✅ मुखाग्नि और ब्राह्मण भोज सिर्फ ब्राह्मणवाद को पोषित करने की साजिश है।
✅ स्वर्ग-नरक और आत्मा-परमात्मा जैसी अवधारणाएं सिर्फ डर और शोषण का हथियार हैं।

यह भाषण वास्तव में समाज को झकझोर देने वाला है और ब्राह्मणवाद की जड़ों को हिलाने वाला है। डॉक्टर यादव का कहना है कि जब तक लोग इन पाखंडों को छोड़कर विज्ञान और तर्क को नहीं अपनाएंगे, तब तक असली समानता और स्वतंत्रता संभव नहीं है।

01/09/2025

इस वीडियो में शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में ब्राह्मण रामभद्राचार्य द्वारा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का जवाब दिया गया है। रामभद्राचार्य ने कहा कि डॉ. अंबेडकर को संस्कृत नहीं आती थी, अगर आती तो वे मनुस्मृति नहीं जलाते। उन्होंने मनुस्मृति को भारत का शाश्वत संविधान बताया और कहा इसमें कोई राष्ट्र विरोधी श्लोक नहीं है।

अर्जक संघ प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता जी ने इस जातिवादी सोच और पाखंड की कड़ी आलोचना करते हुए रामभद्राचार्य से सीधा सवाल किया –
अगर शूद्र पैर से जन्म लेकर नीच नहीं है तो कितने ब्राह्मणों ने दलित चमार समाज से रिश्ता किया है?
कितने ब्राह्मणों ने चमार जाति का पैर छूकर आशीर्वाद लिया है?
अगर डॉ. अंबेडकर को संस्कृत नहीं आती थी, तो अंधे हुए रामभद्राचार्य को संस्कृत किसने सिखाई?
अगर संस्कृत इतनी शक्तिशाली थी तो मुग़ल और अंग्रेजों को संस्कृत क्यों नहीं सिखाई गई और अंग्रेजी क्यों हावी हो गई?

इस वीडियो में अंधविश्वास, पाखंड और ब्राह्मणों की जातिवादी मानसिकता का पर्दाफाश किया गया है। दिखाया गया है कि किस तरह ये लोग अपनी नीच सोच और जहिलियत भरे तर्कों से समाज को गुमराह करते हैं और डॉ. अंबेडकर जैसे महापुरुष का अपमान करने की कोशिश करते हैं।

डॉ. अंबेडकर ने मनुस्मृति को जातिवादी धार्मिक ग्रंथ बताया, जिसने ब्राह्मणवादी समाज में शुद्ध अशुद्ध का विभाजन गहराया है यह उनकी Annihilation of Caste रचनाओं का मूल तर्क है, जहाँ वे धर्मशास्त्रों द्वारा संवैधानिक मानवता पर छँटाई का विरोध करते हैं। अंबेडकर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जाति केवल श्रम का विभाजन नहीं है, बल्कि श्रमिकों का विभाजन है जहाँ सामाजिक व्यवस्थाएँ व्यक्तिगत क्षमता और इच्छा को कुंद कर देती हैं, ब्राह्मणों द्वारा अपनाया गया अंतर्जातीय विवाह ही पूरे भारत में जाति व्यवस्था की संरचना की नींव साबित हुआ इस बात की पहचान उन्होंने अपने शोध-पत्र Castes in IndiaTheir Mechanism, Genesis and Development में की है। मनुस्मृति जैसे ग्रन्थों ने ‘शुद्धता’ और ‘अशुद्धता’ का मिथक धार्मिक आधार पर स्थापित किया, जिससे दलितों को ‘नीच’ मानने की मानसिकता को धार्मिक स्वीकृति मिली डॉ. अंबेडकर के अनुसार, जाति-भेद ने नैतिकता, सार्वजनिक भावना और एकता की भावना को हिंदू समाज में प्रभावित किया है जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक विकास में बाधा आई है

30/08/2025

इस वीडियो में अर्जक संघ प्रदेश अध्यक्ष माननीय अरुण कुमार गुप्ता जी से खास बातचीत की गई है। वीडियो में चर्चा है कि चीन भारत से 2 साल बाद आजाद होने के बावजूद आज तरक्की की ऊँचाइयों पर कैसे पहुँच गया और क्यों भारत पिछड़ गया। यहाँ गहराई से बताया गया है कि चीन ने देवी-देवता, भगवान, आत्मा-परमात्मा, स्वर्ग-नरक जैसे आडंबर और अंधविश्वास से दूरी बनाई, जबकि भारत आज भी पाखंडी परंपराओं में जकड़ा हुआ है। चीन भारत से बाद में आज़ाद होकर आगे कैसे निकल गया? | अर्जक संघ अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता की प्रतिक्रिया तथागत बुद्ध और अंधविश्वास।

क्यों भारत ने तथागत बुद्ध के विचारों को नष्ट किया?
आखिर दूसरे देशों ने बुद्ध के मार्ग को अपनाकर प्रगति क्यों की?
हमारे देश में तथागत बुद्ध को चोर क्यों कहा जाता है जबकि बलात्कारी बाबा और पाखंडी साधुओं की पूजा क्यों होती है?
मनुवादी और जातिवादी मानसिकता ने भारत को पिछड़ेपन में क्यों धकेल दिया?

यह वीडियो उन सभी सवालों पर प्रकाश डालता है जो भारत की सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक सच्चाई को सामने लाता है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि भारत तरक्की क्यों नहीं कर पाया और चीन कैसे आगे निकल गया, तो यह वीडियो जरूर देखें। चीन भारत तुलना, चीन तरक्की का कारण, भारत पिछड़ा क्यों, तथागत बुद्ध विचारधारा, बुद्ध धर्म क्यों अपनाएँ, अर्जक संघ अरुण कुमार गुप्ता, पाखंड और अंधविश्वास, जातिवाद और ब्राह्मणवाद, बाबा बलात्कारी, भगवान ईश्वर स्वर्ग नरक, बुद्ध को चोर क्यों कहा, चीन ने देवी देवता क्यों नहीं अपनाए

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29/08/2025

यह वीडियो डॉ. प्रवीण चंद्रा के 7–8 देशों (अधिकतर बौद्ध देशों) के अनुभवों—विशेषकर उनके हालिया चीन दौरे—पर एक गहन बातचीत है। जब यह बात अर्जक संघ प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता जी को पता चली तो उन्होंने उत्सुकता से कई सीधे प्रश्न रखे: वहां की व्यवस्था कैसी है? लोग कैसे हैं? क्या वहां मूर्ति-पूजा होती है या देवी-देवताओं को भगवान का दर्जा दिया जाता है? क्या जाति/भेदभाव जैसी समस्याएँ हैं? और सबसे अहम—जो देश भारत से दो वर्ष बाद आज़ाद हुआ, वह आज कई गुना आगे कैसे पहुँचा?

इस चर्चा में हम तथागत बुद्ध के विचार, वैज्ञानिक दृष्टि, शिक्षा, समानता, अनुशासन, और तर्कशीलता जैसे मूल्यों को समझते हैं—जिन्हें अनेक देशों ने अपनाया और जिनसे उनके विकास की राह बनी। साथ ही, हम इस प्रश्न पर भी बात करते हैं कि भारत, जिसे दुनिया “बुद्ध की धरती” के रूप में जानती है, यहाँ बुद्ध-विचार क्यों हाशिये पर चला गया और इसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ा।
अरुण कुमार गुप्ता जी—जो अक्सर अंधविश्वास, पाखंड, काल्पनिक देवी-देवता, मूर्ति-पूजा, स्वर्ग-नरक, आत्मा-परमात्मा, भूत-प्रेत जैसी बातों से समाज को दूर रहने की नसीहत देते हैं—डॉ. प्रवीण चंद्रा से सुनते हैं कि विभिन्न बौद्ध देशों में सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था, शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, और नागरिक शिष्टाचार को कैसे प्राथमिकता दी जाती है।

वीडियो में क्या-क्या:-
• चीन व अन्य बौद्ध देशों में व्यवस्था और जनजीवन
• क्या वहाँ मूर्ति-पूजा/देवी-देवताओं को ईश्वरीय दर्जा मिलता है?
• जाति/भेदभाव बनाम समानता व मानवता के मूल्य
• “भारत बनाम चीन” प्रगति के कारण: शिक्षा, विज्ञान, नीति-कार्यान्वयन, नागरिक व्यवहार
• भारत की वैश्विक पहचान: “बुद्ध की धरती” और उसका अर्थ
• बुद्ध-विचार और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों का संबंध

यदि आप तर्क, विज्ञान और मानवता आधारित समाज के पक्षधर हैं, यह बातचीत आपके लिए है। पूरा वीडियो देखें, विचार साझा करें, और चैनल को सब्सक्राइब करें।

23/08/2025

Arun Kumar Gupta | जातिवादी ब्राह्मणों को दलित दामाद क्यों पसंद नहीं? | Rahul Mandal Tanu Priya Case | Jati Hai Ki Jati Nahi

20/08/2025

Arun Kumar Gupta | ब्राह्मणों सूअर को देवता के देवता बनाया और इंसान को अछूत कह कर पीटा | Hindu Dharm | Arjak Sangh Official Tv

16/08/2025

In India, the defenders of casteism and Brahmin supremacy openly insult Dr. B.R. Ambedkar, the maker of the Indian Constitution, and even disrespect Gautam Buddha by calling him names, because Ambedkar exposed the false idea of birth-based superiority, challenged Brahmanism, defended equality, social justice, and Dalit rights, while these anti-constitution voices fear the rise of scientific thinking, rationalism, and the Bahujan movement against caste discrimination

11/08/2025
11/08/2025

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