19/01/2026
🌺 Class 134 | Durga Saptashati Path | ऋग्वेदोक्त देवीसूक्त | पदच्छेद–भावार्थ सहित |
ऋग्वेदोक्त देवीसूक्त वैदिक साहित्य का अत्यन्त उच्च, दार्शनिक और तत्त्वबोधक सूक्त है,
जिसमें देवी स्वयं को सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान और सम्पूर्ण जगत् की अधिष्ठात्री सत्ता के रूप में प्रकट करती हैं।
इस सूक्त में देवी यह उद्घोष करती हैं कि—
वे ही ब्रह्मा, रुद्र, इन्द्र तथा समस्त देवताओं में स्थित शक्ति हैं, वे ही भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं,
और समस्त सृष्टि, स्थिति एवं लय उन्हीं के अधीन है।
यह पाठ साधक को देवी-तत्त्व का प्रत्यक्ष बोध,
अहंकार-नाश, भय-शमन तथा आत्मबल और वैराग्य की ओर अग्रसर करता है।
⚜️ मुख्य प्रसंग (Highlights)
🔹 देवी का स्वयं को सर्वव्यापक एवं जगत्-अधिष्ठात्री शक्ति के रूप में उद्घोष
🔹 समस्त देवताओं, प्राणियों और शक्तियों में देवी-शक्ति का एकत्व
🔹 देवी द्वारा भोग, ऐश्वर्य, रक्षा और मोक्ष प्रदान करने की सामर्थ्य
🔹 श्रद्धा से की गई देवी-स्तुति द्वारा भय, क्लेश और शत्रुओं का नाश
🔹 देवी को सृष्टि-स्थिति-लय की मूल कारण शक्ति के रूप में स्वीकार
🌸 देवीसूक्त पाठ का फल
✔ देवी-तत्त्व का वैदिक बोध
✔ भय, दारिद्र्य और मानसिक क्लेश का शमन
✔ आत्मबल, श्रद्धा और वैराग्य की वृद्धि
✔ आध्यात्मिक तेज एवं साधना में दृढ़ता
✔ देवी कृपा से लौकिक-पारलौकिक कल्याण
🎧 पाठ विवरण
📚 ग्रंथ: Durga Saptashati / ऋग्वेद
📿 सूक्त: ऋग्वेदोक्त देवीसूक्तम्
🕉️ विधि: पदच्छेद – अन्वय – हिन्दी भावार्थ सहित
🎙️ उच्चारण एवं व्याख्या: Dr. Akhilesh Kumar Mishra
📺 प्रस्तुति: Adhyaatma Jagat