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26/01/2025

अपने अपने घर 5G network 🛜 🛜 टावर लगाए 100 रुपए

25/01/2025

मौजूदा विधायक विनेश फोगाट ने अधिकारियों को लगाई लताड़ लाइव प्रसारण

24/01/2025

हॉलैंड ट्रैक्टर के डेमो के वक्त हुई झगड़े की वजह क्या?

17/01/2025

गोहाना के फूल सिंह महिला मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां की एक फर्स्ट ईयर की छात्रा द्वारा रेगिंग के कथित आरोपों पर 6 सीनियर छात्राओं के रेस्टीगरेट के मामले ने तूल पकड़ लिया।
इस मामले को लेकर सीनियर छात्राओं ने परिसर में जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि ये आरोप पूरी तरह से झूठे हैं। कई दिन पहले फर्स्ट ईयर की एक छात्रा द्वारा रेगिंग के आरोपों पर कॉलेज प्रशासन ने 6 सीनियर छात्राओं के रेस्टीगरेट के लेटर जारी कर दिए। इस पर बृहस्पतिवार को सीनियर छात्राओं ने इकट्ठे होकर हंगामा कर दिया।

उनका कहना था कि रेगिंग के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बगैर उनका पक्ष जाने रेस्टीगरेट के लेटर जारी कर दिए। उन्होंने कहा कि बेहतर होता कि जांच में सबको शामिल किया जाना चाहिए था।

इस दौरान मेडिकल कॉलेज परिसर में सुरक्षा कर्मी भी तैनात रहे। इस मामले में मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. जगदीशचंद्र दुरेजा से बातचीत करने का प्रयास किया मगर उनके मीटिंग में होने के कारण संपर्क नहीं हो पाया।


14/01/2025

महाकुंभ 2025 स्नान के लिए घाट पर इन रास्तों से पहुंचे और श्रद्धालुओं के लिए शेयर करे।

12/01/2025

जिंदगी और मौत के बीच की जंग। मस्ती के संग इसे बहादुरी कहेंगे या पागलपन 1 सेकेंड में मौत हो सकती दे अपनी राय कॉमेंट में

11/01/2025

भगवान शिव की जटा से हुई जाट की उत्पति बता रहे है महाराज

31/12/2024
29/12/2024
27/12/2024

सोचिए कितना टैक्स दे रहे हो आप
आप के राघव चड्ढा ने गिना दिए ।
#आप

27/12/2024

तेरी रहनुमाई ही बचा गई उस मंदी में,
नहीं सुना पाता वो अपने मन की मनघंडत बात
शत शत नमन

16/08/2024
11/08/2024
16/06/2024
 #रिसोर्ट_मे_विवाह नई सामाजिक बीमारी ??कुछ समय पहले तक शहर के अंदर मैरिज हॉल मैं शादियाँ होने की परंपरा चली परंतु वह दौर...
17/12/2023

#रिसोर्ट_मे_विवाह नई सामाजिक बीमारी ??

कुछ समय पहले तक शहर के अंदर मैरिज हॉल मैं शादियाँ होने की परंपरा चली परंतु वह दौर भी अब समाप्ति की ओर है।
अब शहर से दूर महंगे रिसोर्ट में शादियाँ होने लगी हैं। #शादी के 2 दिन पूर्व से ही ये रिसोर्ट बुक करा लिया जाते हैं और शादी वाला परिवार वहां शिफ्ट हो जाता है। #आगंतुक और मेहमान सीधे वहीं आते हैं और वहीं से विदा हो जाते हैं।

जिसके पास चार पहिया वाहन है वही जा पाएगा। #दोपहिया वाहन वाले नहीं जा पाएंगे। बुलाने वाला भी यही स्टेटस चाहता है, और वह निमंत्रण भी उसी श्रेणी के अनुसार देता है।
दो तीन तरह की श्रेणियां आजकल रखी जाने लगी है।
किसको सिर्फ लेडीज संगीत में बुलाना है।
किसको सिर्फ रिसेप्शन में बुलाना है।
किसको कॉकटेल पार्टी में बुलाना है।
और किस परिवार को इन सभी कार्यक्रमों में बुलाना है।
इस निमंत्रण में #अपनापन की भावना खत्म हो चुकी है। सिर्फ मतलब के व्यक्तियों को या परिवारों को आमंत्रित किया जाता है।

महिला संगीत में पूरे परिवार को नाच गाना सिखाने के लिए महंगे कोरियोग्राफर 10-15 दिन ट्रेनिंग देते हैं।

मेहंदी लगाने के लिए आर्टिस्ट बुलाए जाने लगे है। #मेहंदी में सभी को #हरी ड्रेस पहनना अनिवार्य है जो नहीं पहनता है उसे हीन भावना से देखा जाता है लोअर केटेगरी का मानते हैं

फिर #हल्दी की रस्म आती है, इसमें भी सभी को #पीला कुर्ता पाजामा पहनना अति आवश्यक है इसमें भी वही समस्या है जो नहीं पहनता है उसकी इज्जत कम होती है।

इसके बाद वर निकासी होती है, इसमें अक्सर देखा जाता है जो पंडित को दक्षिणा देने में 1 घंटे डिस्कशन करते है। वह #बारात प्रोसेशन में 5 से 10 हजार नाच गाने पर उड़ा देते हैं ।
इसके बाद रिसेप्शन स्टार्ट होता है। #स्टेज पर वरमाला होती है पहले लड़की और लड़के वाले मिलकर हंसी मजाक करके वरमाला करवाते थे। आजकल स्टेज पर #धुंए की धूनी छोड़ देते है।
दूल्हा-दुल्हन को अकेले छोड़ दिया जाता है, बाकी सब को दूर भगा दिया जाता है
और #फिल्मी स्टाइल में स्लो मोशन में वह एक दूसरे को वरमाला पहनाते है, साथ ही नकली आतिशबाजी भी होती है ।

स्टेज के पास एक स्क्रीन लगा रहता है, उसमें #प्रीवेडिंग सूट की वीडियो चलती रहती है।उसमें यह बताया जाता है की शादी से पहले ही लड़की लड़के से मिल चुकी है और कितने अंग प्रदर्शन वाले कपड़े पहन कर
कहीं चट्टान पर
कहीं बगीचे में
कहीं कुएं पर
कहीं बावड़ी में
कहीं श्मशान में कहीं नकली फूलों के बीच अपने परिवार की इज्जत को #नीलाम कर के आ गई है ।

प्रत्येक परिवार अलग-अलग कमरे में ठहरेगा।
जिसके कारण दूरदराज से आए बरसों बाद रिश्तेदारों से मिलने की #उत्सुकता कहीं खत्म सी हो गई है।
क्योंकि सब अमीर हो गए हैं पैसे वाले हो गए है। मेल मिलाप और आपसी स्नेह खत्म हो चुका है।
रस्म अदायगी पर मोबाइलों से बुलाये जाने पर कमरों से बाहर निकलते है। सब अपने को एक दूसरे से रईस समझते है।
और यही अमीरीयत का दंभ उनके व्यवहार से भी झलकता है।
कहने को तो रिश्तेदार की शादी में आए हुए होते हैं
परंतु अहंकार उनको यहां भी नहीं छोड़ता।
वे अपना #अधिकांश समय करीबियों से मिलने के बजाय अपने अपने कमरो में ही गुजार देते है।

हमारी #संस्कृति को दूषित करने का बीड़ा ऐसे ही अति संपन्न वर्ग ने अपने कंधों पर उठाए रखा है।

मेरा अपने #मध्यमवर्गीय समाज बंधुओं से अनुरोध है
आपका पैसा है ,आपने कमाया है। आपके घर खुशी का अवसर है खुशियां मनाएं, पर किसी दूसरे की देखा देखी नहीं।

कर्ज लेकर अपने और परिवार के मान #सम्मान को खत्म मत करिएगा

जितनी आप में क्षमता है उसी के अनुसार खर्चा करिएगा
4 - 5 घंटे के रिसेप्शन में लोगों की जीवन भर की पूंजी लग जाती है !

दिखावे की इस सामाजिक बीमारी को #अभिजात्य वर्ग तक ही सीमित रहने दीजिए!

अपना दांपत्य जीवन सर उठा के, #स्वाभिमान के साथ शुरू करिए और खुद को अपने परिवार और अपने समाज के लिए सार्थक बनाइए !

धन्यवाद………… 🙏🙏🙏

18/07/2023

क्या सीमा हैदर ने सब को धोखा दिया है। Everyone

बाबा!मुझे उतनी दूर मत ब्याहनाजहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिरघर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हेमत ब्याहना उस देश मेंजहाँ आदमी स...
16/06/2023

बाबा!
मुझे उतनी दूर मत ब्याहना
जहाँ मुझसे मिलने जाने ख़ातिर
घर की बकरियाँ बेचनी पड़े तुम्हे

मत ब्याहना उस देश में
जहाँ आदमी से ज़्यादा
ईश्वर बसते हों

जंगल नदी पहाड़ नहीं हों जहाँ
वहाँ मत कर आना मेरा लगन

वहाँ तो कतई नहीं
जहाँ की सड़कों पर
मान से भी ज़्यादा तेज़ दौड़ती हों मोटर-गाडियाँ
ऊँचे-ऊँचे मकान
और दुकानें हों बड़ी-बड़ी

उस घर से मत जोड़ना मेरा रिश्ता
जिस में बड़ा-सा खुला आँगन न हो
मुर्ग़े की बाँग पर होती नहीं हो जहाँ सुबह
और शाम पिछवाड़े से जहाँ
पहाड़ी पर डूबता सूरज न दिखे
मत चुनना ऐसा वर
जो पोचई और हड़िया में डूबा रहता हो अक्सर
काहिल-निकम्मा हो
माहिर हो मेले से लड़कियाँ उड़ा ले जाने में
ऐसा वर मत चुनना मेरी ख़ातिर

कोई थारी-लोटा तो नहीं
कि बाद में जब चाहूँगी बदल लूँगी
अच्छा-ख़राब होने पर

जो बात-बात में
बात करे लाठी-डंडा की
निकाले तीर-धनुष, कुल्हाड़ी
जब चाहे चला जाए बंगाल, असम या कश्मीर
ऐसा वर नहीं चाहिए हमें

और उसके हाथ में मत देना मेरा हाथ
जिसके हाथों ने कभी कोई पेड़ नहीं लगाए
फ़सलें नहीं उगाईं जिन हाथों ने
जिन हाथों ने दिया नहीं कभी किसी का साथ
किसी का बोझ नहीं उठाया

और तो और!
जो हाथ लिखना नहीं जानता हो ‘ह’ से हाथ
उसके हाथ मत देना कभी मेरा हाथ!

ब्याहना हो तो वहाँ ब्याहना
जहाँ सुबह जाकर
शाम तक लौट सको पैदल
मैं जो कभी दुख में रोऊँ इस घाट
तो उस घाट नदी में स्नान करते तुम
सुनकर आ सको मेरा करुण विलाप

महुआ की लट और
खजूर का गुड़ बनाकर भेज सकूँ संदेश तुम्हारी ख़ातिर
उधर से आते-जाते किसी के हाथ
भेज सकूँ कद्दू-कोहड़ा, खेखसा, बरबट्टी
समय-समय पर गोगो के लिए भी

मेला-हाट-बाज़ार आते-जाते
मिल सके कोई अपना जो
बता सके घर-गाँव का हाल-चाल
चितकबरी गैया के बियाने की ख़बर
दे सके जो कोई उधर से गुज़रते
ऐसी जगह मुझे ब्याहना!

उस देश में ब्याहना
जहाँ ईश्वर कम आदमी ज़्यादा रहते हों
बकरी और शेर
एक घाट पानी पीते हों जहाँ
वहीं ब्याहना मुझे!

उसी के संग ब्याहना जो
कबूतर के जोड़े और पंडुक पक्षी की तरह
रहे हरदम हाथ
घर-बाहर खेतों में काम करने से लेकर
रात सुख-दुख बाँटने तक
चुनना वर ऐसा
जो बजाता हो बाँसुरी सुरीली
और ढोल-माँदल बजाने में हो पारंगत

वसंत के दिनों में ला सके जो रोज़
मेरे जूड़े के ख़ातिर पलाश के फूल

जिससे खाया नहीं जाए
मेरे भूखे रहने पर
उसी से ब्याहना मुझे!

कवयित्री: निर्मला पुतल जी द्वारा लिखित रचना
(ये पोस्ट मझे कहीं से मिली अच्छी लगी तो शेयर कर दी आप भी शेयर करे)


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